पंजाब सरकार द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘युद्ध नशों के विरुद्ध अभियान 2.0’ के तहत सोमवार को मोगा के किल्ली चाहलां में राज्य स्तरीय महा-रैली आयोजित की गई। सरकार ने अभियान को लेकर जोरदार संदेश दिया, लेकिन इस आयोजन की वजह से आम लोगों और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पुलिस की कड़ी घेराबंदी और कई प्रमुख मार्गों पर रूट डायवर्जन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रही। यात्रियों को मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की दिक्कतें झेलनी पड़ीं। सबसे ज्यादा असर सरकारी परिवहन सेवा पर देखने को मिला। मोगा डिपो की कुल 71 बसों में से करीब 50 बसें रैली में भीड़ जुटाने के लिए लगा दी गईं, जिससे बस स्टैंड पर सन्नाटा पसरा रहा। सैकड़ों यात्री, जिनमें बुजुर्ग और छोटे बच्चों के साथ परिवार भी शामिल थे, घंटों बसों का इंतजार करते नजर आए। रोजाना काम पर जाने वाले लोगों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
यात्रियों के अनुसार, जहां पहले सफर में करीब 30 मिनट लगते थे, वहीं रूट डायवर्जन के कारण अब 1.5 से 2 घंटे तक का समय लग रहा है। मोगा शहर में आने के लिए कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया था।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि रूट बदलाव की सूचना दो दिन पहले दे दी गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर लोग पुलिस और प्रशासन की व्यवस्था से खासे नाराज दिखे। लोगों का कहना है कि राजनीतिक रैलियों में आम जनता की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित न हो।

