लुधियाना। गांव बल्लोवाल में लोहड़ी कार्यक्रम के दौरान हुई फायरिंग और पूर्व सरपंच पर हमले के मामले में एक एसएचओ पर केस दबाने और जबरन राजीनामा करवाने के लिए पैसे मांगने के आरोप लगे हैं।
भारतीय किसान यूनियन दोआबा के जिला अध्यक्ष जसप्रीत सिंह ढट निवासी गांव ढट ने बताया कि गांव बल्लोवाल के पूर्व सरपंच गुरमिंदर सिंह उर्फ बिल्ला लोहड़ी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गांव आए हुए थे। इसी दौरान कुछ युवक शराब के नशे में फायरिंग कर रहे थे। जब गुरमिंदर सिंह ने उन्हें ऐसा करने से रोका तो युवकों और उनके साथियों ने माहौल खराब करते हुए फायरिंग कर दी और उन पर हमला कर दिया।
आरोप है कि हमलावरों ने गुरमिंदर सिंह की पगड़ी उतारकर उनके सिर पर वार किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। घायल गुरमिंदर सिंह का मेडिकल लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) सिविल अस्पताल रायकोट में दर्ज है।
जसप्रीत सिंह ढट ने आरोप लगाया कि फायरिंग करने वाले युवक पुलिस अधिकारी के करीबी बताए जा रहे हैं, जिसके चलते एसएचओ ने इस मामले को वरिष्ठ अधिकारियों के ध्यान में नहीं लाया और केस दर्ज करने की बजाय राजीनामा करवाने का दबाव बनाया।
उन्होंने बताया कि 26 फरवरी 2026 को जब वह इस मामले को लेकर एसएचओ के कार्यालय पहुंचे तो एसएचओ ने दोनों पक्षों में समझौता करवाने के नाम पर 2.50 लाख रुपये मुआवजा दिलाने की बात कही, जिसमें से 50 हजार रुपये खुद लेने की मांग की गई। बाद में राजीनामा 1.50 लाख रुपये में करवाया गया और उसमें से भी हिस्सा मांगने का आरोप लगाया गया। ढट ने कहा कि एसएचओ ने मौके पर 40 हजार रुपये दिए और बाकी 1.10 लाख रुपये अगले दिन कार्यालय से देने की बात कही। जब वह पैसे लेने गए तो उसमें से भी 30 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया।
भारतीय किसान यूनियन दोआबा के नेताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन विरोध प्रदर्शन करेगा।
इस संबंध में एसएसपी डॉ. अंकुर गुप्ता ने बताया कि पुलिस अधिकारी के खिलाफ आई शिकायत की जांच एसपी को सौंप दी गई है। जांच में यदि जरा सी भी सच्चाई पाई गई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, एसएचओ ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताते हुए कहा कि पुलिस शिकायत के आधार पर कार्रवाई करती है। राजीनामा करना या न करना शिकायतकर्ता का अपना फैसला होता है, पुलिस किसी पर समझौते के लिए दबाव नहीं बनाती।

