मोगा शहर के पॉश इलाके न्यू टाउन समेत आसपास के हिस्सों में रहते हजारों लोग आज भी अपनी पैतृक संपत्ति पर मालिकाना हक को लेकर असमंजस में हैं। पार्षद साहिल अरोड़ा ने वार्टनगंज के मामले को लेकर निगम कमिश्नर कम ए.डी.सी जसपिंदर सिंह से मुलाकात कर सौंपा मांग पत्र कर समस्या का समाधान की मांग की। पार्षद साहिल अरोड़ा ने अपने मांग पत्र में कहा कि बार्टनगंज का यह विवाद 7 साल से लोगों को कानूनी और प्रशासनिक मकड़जाल में उलझाए हुए है। बार्टनगंज (विषय अधीन रकबा) का यह मामला सैकड़ों परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। यह समस्या न्यू टाउन मोहल्ले की गली नंबर 1 से 7, प्रताप रोड, पुरानी दाना मंडी और मेन बाजार के कुछ हिस्सों में बनी हुई है, जिसे बार्टनगंज के नाम से जाना जाता है। पुराने रिकॉर्ड के अनुसार इस पूरे क्षेत्र पर नगर निगम का दावा बताया जाता है, जो अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। स्थानीय पार्षद साहिल अरोड़ा के अनुसार 10 साल पहले जिला प्रशासन ने एक याचिका के आधार पर इस इलाके की प्रापर्टियों की रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी थी। उन्होंने बताया कि बार्टनगंज का अधिकांश हिस्सा उनके वार्ड-38 में आता है और वह लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उन्होंने निगम कमिश्नर कम ए.डी.सी जसपिंदर सिंह से मुलाकात कर इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग दोहराते हुए मांग दिया, ताकि प्रभावित लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि जब लोग अपनी संपत्ति की नकल लेने जाते हैं तो रेवेन्यू विभाग 1944-45 के रिकॉर्ड के आधार पर इस जमीन को फिरोजपुर जिले की मोगा तहसील का हिस्सा बताता है। जबकि मोगा 1972 में फरीदकोट जिले में शामिल हुआ और 1995 में खुद जिला बन गया। उन्होंने कहा कि यह सब कुछ सरकार के स्तर व पटवारखाने में संबंधित पटवारियों द्वारा कुछ गलत इंदराज करने कारण हो रहा है। इसलिए इलाका निवासियों को आ रही परेशानियों को ध्यान में रखकर बार्टनगंज इलाके का कामकाज पहले की तरह ही शुरू किया जाए तथा रजिस्ट्रियां करने पर लगी पाबंदी हटाई जाए। जिसका फायदा इलाके में रहने वाले हर एक निवासी को होगा तथा इसके साथ ही रजिस्ट्रियां शुरू होने कारण तहसीलदार दफ्तर मोगा को रेवेन्यू आना शुरू हो जाएगा तथा नगर निगम मोगा को हर निर्माण का काम करने के चलते आमदन आनी शुरू हो जाएगी।

