लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ चंडीगढ़ में राज्य स्तरीय रैली में सामूहिक छुट्टी लेकर गए मुलाजिमों की गैर-मौजूदगी के कारण शुक्रवार को अमृतसर तहसील और पटवारखाने में ताले देखने को मिले। यहां तक कि रोजाना के मुकाबले तीन तहसीलों में बाद दोपहर तक सिर्फ 70 के करीब रजिस्ट्रीयां हो सकी। जिसका सीधा असर सरकार के राजस्व को पड़ा, हालांकि रूटीन में तीनों तहसीलों में 250 के करीब रजिस्ट्रीयां होती थी। उधर, मुलाजिमों की हड़ताल के समर्थन में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी का नॉन-टीचिंग स्टाफ ने भी यूनिवर्सिटी में कोई काम नहीं किया। अमृतसर डीड राइटर्स एसोसिएशन के एडवोकेट अरविंदर कुमार ने बताया कि हड़ताल के कारण दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोगों को पटवारखाने से जमाबंदी और इंतकाल करवाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।
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रजिस्ट्री का काम अफसरों को दिया : डीसी
डिप्टी कमिश्नर दलविंदर जीत सिंह ने बताया कि हड़ताल के कारण लोगों को परेशानी न आए, अफसरों की छुट्टी रद्द करके उन्हें दफ्तरों में सुबह 9 बजे पहुंचने की हिदायत दी गई थी। अफसरों ने क्लेरिकल स्टाफ की गैर-मौजूदगी में खुद काम किया।

