मानवाधिकार आयोग, पंजाब के सदस्य जतिंदर सिंह शंटी आज मोगा जिले के बाघापुराना और धर्मकोट पहुंचे, जहां उन्होंने लोगों की शिकायतें सुनीं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इस मौके पर जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे। लोगों ने विभिन्न समस्याओं और शिकायतों को आयोग के सदस्य के समक्ष रखा। जतिंदर सिंह शंटी ने अधिकारियों को शिकायतों का उचित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जतिंदर सिंह शैंटी ने नशे, फर्जी इमीग्रेशन, अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और लावारिस शवों समेत कई अहम मुद्दों पर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। नशा लंबे समय से चली आ रही गंभीर समस्या है और इसे जड़ से खत्म करने के लिए सरकार के साथ-साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
जतिंदर सिंह शैंटी ने विदेश भेजने के नाम पर होने वाली फर्जी इमीग्रेशन और शादी के माध्यम से की जा रही धोखाधड़ी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे सैकड़ों मामले मानवाधिकार आयोग के पास पहुंच चुके हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि विदेश भेजने के नाम पर किसी डीलर के निजी बैंक खाते में पैसे जमा न करवाएं। फीस या अन्य भुगतान संबंधित यूनिवर्सिटी अथवा संस्थान के आधिकारिक खाते में ही किया जाए। धोखाधड़ी होने की स्थिति में पहले स्थानीय पुलिस थाने और उसके बाद एसएसपी के पास शिकायत दर्ज करवाने की अपील की।
बकाया बिल के कारण शव रोकने पर अस्पतालों को चेताया
अस्पतालों में मरीज की मौत के बाद बकाया बिल का भुगतान न होने पर शव रोकने के मामलों पर उन्होंने कहा कि निजी अस्पताल बकाया बिल की वजह से किसी व्यक्ति का शव रोक नहीं सकते। उन्होंने अस्पतालों की मोर्चरी में शवों के रखरखाव, एंबुलेंस सुविधा, डॉक्टरों की उपलब्धता और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित शिकायतों पर भी कार्रवाई करने की बात कही।
लावारिस शवों के मामलों को गंभीरता से लेते हुए जतिंदर सिंह शैंटी ने कहा कि नहरों, नदियों, बांधों या जंगलों से मिलने वाले लावारिस शवों की पहचान और उनके अंतिम संस्कार से संबंधित पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि कितने शवों के वारिस नहीं मिल सके और उनकी पहचान क्यों नहीं हो पाई। इसके पीछे आत्महत्या, दुर्घटना अथवा अन्य कारण हो सकते हैं, इसलिए प्रत्येक मामले की उचित जांच और रिकॉर्डिंग जरूरी है। उन्होंने बताया कि यदि किसी गरीब या जरूरतमंद परिवार के पास अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी अथवा अन्य खर्च का प्रबंध नहीं है तो सरकार की ओर से सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। इसके लिए संबंधित नगर परिषद या नगर निगम के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। सरकार की ओर से श्मशान घाटों को भी इसके लिए फंड उपलब्ध करवाया जाता है। अधिकारियों को कार्रवाई कर रिपोर्ट देने के निर्देश जतिंदर सिंह शैंटी ने कहा कि मोगा दौरे के दौरान लोगों की ओर से दी गई शिकायतों को दर्ज किया गया है। संबंधित अधिकारियों को शिकायतों के जल्द निपटारे के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने के निर्दे
श दिए गए हैं।

