कांग्रेस में अनुशासन की बात, लेकिन फैसले पर खुद ही नहीं टिक सकी पार्टी

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नगर कौंसिल के सीनियर मीत प्रधान चुनाव को लेकर कांग्रेस में शुरू हुआ विवाद अब बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम बन गया है। 19 जनवरी को आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कंवरपाल सिंह को वोट डालने के आरोपों के चलते कांग्रेस से बाहर किए गए चार नेताओं के मामले में सोमवार को कांग्रेस नेतृत्व ने नरम रुख अपना लिया।

कांग्रेस हाईकमान द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में जब संबंधित नेताओं ने अपना पक्ष रखा तो पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वडिंग उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नजर आए।

राजा वडिंग ने कहा कि पार्टी में अनुशासन जरूरी है, लेकिन कांग्रेस की परंपरा रही है कि वह अपने कार्यकर्ताओं की बात भी सुनती है। उन्होंने सभी नेताओं से अपील की कि वे पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत करें।

बताया जा रहा है कि जिन चार नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बाहर किया गया था, उनमें रविंद्र सभरवाल (फीना), राज भारद्वाज, काला कल्याण सहित अन्य प्रमुख नेता शामिल थे।

इन पर आरोप था कि कौंसिल चुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के बजाय आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में वोट डाला। इस मामले में हल्का इंचार्ज जगतार सिंह जग्गा हिस्सोवाल ने सख्त कदम उठाते हुए नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था। उस समय दावा किया गया था कि यह फैसला पंजाब प्रधान से बात कर लिया गया है।

लेकिन अब कांग्रेस अपने ही फैसले पर टिकती नजर नहीं आई। सोमवार को हुई बैठक में नेताओं ने अपने जवाब पेश किए और सफाई दी, जिसके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें फिर से पार्टी में शामिल करने का संकेत दे दिया। राजा वडिंग ने यहां तक कह दिया कि आप सभी कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं।

हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पार्टी के भीतर यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के गंभीर आरोप लगे थे, उनकी “घर वापसी” से कांग्रेस में गुटबाजी और अधिक बढ़ सकती है।

सूत्रों के अनुसार इस घटनाक्रम से हल्का इंचार्ज जगतार सिंह जग्गा हिस्सोवाल की राजनीतिक अहमियत भी कम होती नजर आ रही है। वहीं शहर में कांग्रेस नेतृत्व की स्थिरता और फैसलों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बैठक के दौरान पूर्व विधायक जगतार सिंह जग्गा हिस्सोवाल और जिला प्रधान मेजर सिंह देतवाल भी मौजूद रहे।

 

गौरतलब है कि पहले भी यही कांग्रेसी अपनी ही पार्टी के कौंसिल प्रधान रहे जतिंदरपाल राना की आप नेताओं के इशारे पर विरोधता करते रहे है। क्योकि यह पूर्व विधायक जगतार सिंह जग्गा के खाते में गिने जाते है। जबकि राना भारत भूषन आशू गुट के थे।

 

अब चर्चा यह है कि कांग्रेस इस फैसले से संगठनात्मक एकजुटता मजबूत करेगी या पहले से चल रही गुटबाजी को और हवा मिलेगी यह आने वाला समय ही बताएगा।

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