: ब्रह्मलीन स्वामी वेदान्तानंद जी महाराज की पावन तपोस्थली एवं ब्रह्मलीन स्वामी सहज प्रकाश जी महाराज की कर्मस्थली गीता भवन, मोगा में गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान आज भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्मोत्सव का प्रसंग अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। कथा स्थल पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य की अलौकिक झांकी प्रस्तुत की गई, जिससे पूरा वातावरण नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्मलीन स्वामी वेदान्तानंद जी महाराज की प्रतिमा के समक्ष विधिवत पूजन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग, महामंत्री अंशुल श्रीकुंज, जॉइंट सेक्रेटरी सुरेंद्र गोयल, सीनियर उपाध्यक्ष रविंद्र सूद, उपाध्यक्ष भरत अग्रवाल एवं कैशियर योगेश गर्ग सहित अन्य श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के श्रीचरणों में नमन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य भव्य कलश पूजन भी संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने कलश पूजन में भाग लेकर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी एवं भगवान श्रीकृष्ण से अपने परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना की। सुसज्जित कलशों और पुष्पों से सुसज्जित कथा पंडाल दिव्य आध्यात्मिक आभा से आलोकित दिखाई दिया। कथा व्यास आचार्य पंडित सत्य नारायण जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण एवं ओजस्वी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी पर अधर्म, अत्याचार और अन्याय बढ़ गया तथा कंस के अत्याचारों से समस्त प्रजा त्रस्त हो गई, तब धर्म की स्थापना और सज्जनों की रक्षा के लिए भगवान श्रीहरि ने देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। जैसे ही मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ, कारागार के सभी बंधन स्वत: टूट गए, पहरेदार गहरी निद्रा में चले गए और समस्त वातावरण दिव्य प्रकाश से आलोकित हो उठा। आचार्य जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि धर्म, प्रेम, करुणा और मानवता की विजय का संदेश है। श्रीकृष्ण का अवतार हमें यह प्रेरणा देता है कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब ईश्वर किसी न किसी रूप में धर्म की रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर कथा स्थल पर विशेष उत्साह देखने को मिला। जन्म प्रसंग के उपरांत श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की गई तथा भगवान के जन्म की खुशी में माखन-मिश्री, खिलौनों, टॉफियों तथा विभिन्न प्रकार के प्रसादों का वितरण किया गया। बच्चों और महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष करते हुए प्रसाद ग्रहण किया और भक्ति रस में सराबोर हो गए। इस अवसर पर गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग ने कहा कि गीता भवन केवल एक धार्मिक संस्थान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और मानव सेवा का सशक्त केंद्र है। ब्रह्मलीन स्वामी वेदान्तानंद जी महाराज द्वारा स्थापित यह पावन धाम आज भी समाज को धर्म, संस्कार और सेवा का संदेश दे रहा है। उन्होंने कहा कि गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी निरंतर ऐसे धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रही है। ट्रस्ट सोसायटी के पदाधिकारियों ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और कथा के माध्यम से धर्म एवं अध्यात्म का अमृतपान कर रहे हैं। कथा स्थल पर की गई व्यवस्थाओं और आध्यात्मिक वातावरण की श्रद्धालुओं द्वारा मुक्त कंठ से सराहना की जा रही है। अंत में गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग, महामंत्री अंशुल श्रीकुंज, जॉइंट सेक्रेटरी सुरेंद्र गोयल, सीनियर उपाध्यक्ष रविंद्र सूद, उपाध्यक्ष भरत अग्रवाल एवं कैशियर योगेश गर्ग ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे 15 जून तक प्रतिदिन सायं 4 बजे से 7 बजे तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में परिवार सहित पहुंचकर कथा श्रवण करें और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा तथा संत-महापुरुषों के आशीर्वाद से अपने जीवन को सुख, शांति, भक्ति और आध्यात्मिक प्रकाश से आलोकित करें। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि गीता भवन, मोगा केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र है, जहां से समाज को निरंतर धर्म और संस्कारों की प्रेरणा प्राप्त हो रही है।

