44 साल पुराने सरकारी स्कूल की हालत जर्जर, टीन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर 130 बच्चे

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स्थानीय लाजपत नगर में वर्ष 1981 में स्थापित सरकारी प्राइमरी स्कूल की हालत बेहद खस्ता हो चुकी है। करीब 44 साल पुराने इस स्कूल में पढ़ने वाले लगभग 130 बच्चे कड़कती धूप, आंधी और बारिश के दौरान भी सीमेंट की चादरों से बने शेड के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल की जर्जर इमारत और कमरों की कमी के कारण विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल में शुरुआत में दो कमरों का निर्माण किया गया था, लेकिन समय के साथ दोनों कमरों की हालत जर्जर हो गई है। बारिश के दौरान छतों से चारों तरफ पानी टपकता है। इसके अलावा एक अन्य कमरा भी बना हुआ है, जिसकी छत सीमेंट की चादरों से ढकी हुई है। स्कूल में कक्षाओं के लिए तीन और कमरों की आवश्यकता है, लेकिन कमरे उपलब्ध नहीं होने के कारण शेड डालकर सीमेंट की चादरों से उसे ढका गया है। मौसम खराब होने पर बच्चों को इसी शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। जब वर्ष 1981 में स्कूल का निर्माण हुआ था, उस समय आसपास ज्यादा आबादी नहीं थी। समय के साथ क्षेत्र की आबादी बढ़ी और विद्यार्थियों की संख्या भी बढ़ गई। वर्तमान में करीब 130 बच्चे यहां शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके बावजूद स्कूल में पर्याप्त कमरे और सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। स्कूल की समस्या रेलवे विभाग की जमीन से भी जुड़ी हुई है। रेलवे की ओर से अपनी जमीन की चारदीवारी किए जाने के बाद स्कूल तक पहुंचने वाला रास्ता बंद हो गया। बताया जा रहा है कि स्कूल की लगभग आधी इमारत रेलवे की जमीन पर आती है। रास्ता बंद होने के कारण करीब 50 बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं, क्योंकि उनके लिए स्कूल पहुंचना मुश्किल हो गया है। डीईओ एलीमेंट्री अंजना कौशल ने बताया कि यह स्कूल रेलवे की जमीन पर चल रहा है। स्कूल के लिए नई जगह का चयन कर लिया गया है और इसका केस डिप्टी कमिश्नर की ओर से भेजा जा चुका है। नई जगह मिलने के बाद जल्द ग्रांट मंगवाकर स्कूल भवन का निर्माण करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चे इसी स्कूल में पढ़ना चाहते हैं और यहां पढ़ाई अच्छी चल रही है। रेलवे की जमीन से जुड़ी समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा।

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