भगत सिंह के सपनों का भारत बनाने की जिम्मेदारी आज के युवाओं पर डा. सैफुद्दीन किचलू पब्लिक स्कूल में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर विद्यार्थियों ने जाना जीवन, संघर्ष और विचारधारा

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भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए केवल अपने जीवन का बलिदान नहीं दिया, बल्कि उन्होंने एक ऐसे भारत का सपना देखा था, जहां युवा जागरूक, शिक्षित, विचारशील और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार हों। आज उनके सपनों के भारत को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी देश के विद्यार्थियों के कंधों पर है।” यह विचार डा. सैफुद्दीन किचलू पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में स्कूल के चेयरमैन एडवोकेट सुनील गर्ग ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भगत सिंह के जीवन, संघर्ष, अध्ययनशील व्यक्तित्व, विचारों और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण से परिचित करवाना ही नहीं, बल्कि यह समझाना भी था कि देशभक्ति केवल नारों तक सीमित नहीं होती, बल्कि ईमानदारी से पढ़ना, अपने कर्तव्यों को निभाना, समाज के प्रति संवेदनशील रहना और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देना भी सच्ची देशभक्ति है। इस अवसर पर स्कूल के चेयरमैन एडवोकेट सुनील गर्ग, डायरेक्टर सुनीता गर्ग, डीन मलकीत सिंह, प्रिंसिपल हेमप्रभा सूद, हैडमिस्ट्रेस रूही सिंह, समूह स्टाफ एवं विद्यार्थियों ने शहीद भगत सिंह के चित्र के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित किए। विद्यार्थियों ने भगत सिंह के जीवन, विचारों और देशभक्ति की भावना पर आधारित स्लोगन एवं चार्ट प्रस्तुत किए तथा उनके जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी साझा की। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि भगत सिंह का व्यक्तित्व केवल एक क्रांतिकारी तक सीमित नहीं था। वह गंभीर अध्येता, चिंतक, लेखक और पत्रकार भी थे। जेल में रहते हुए भी उनका पढ़ने और लिखने का जुनून कम नहीं हुआ। उनके जीवन की यह विशेषता विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रेरणा का विषय बनी कि जिस युवा ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित किया, वह पुस्तकों और विचारों को भी उतना ही महत्व देता था। चेयरमैन एडवोकेट सुनील गर्ग ने कहा कि भगत सिंह का जीवन विद्यार्थियों को यह संदेश देता है कि युवा अवस्था केवल सपने देखने की उम्र नहीं, बल्कि अपने ज्ञान, प्रतिभा और ऊर्जा को राष्ट्रहित में लगाने का समय है। उन्होंने कहा कि भगत सिंह किताबों को अपना साथी मानते थे। वह विभिन्न भाषाओं के साहित्य और राजनीतिक-सामाजिक विचारों का अध्ययन करते थे। उनका मानना था कि किसी भी परिवर्तन की शुरुआत जागरूक सोच से होती है। आज के विद्यार्थियों को भी मोबाइल और तकनीक के युग में पुस्तकों, ज्ञान और चिंतन से अपना रिश्ता मजबूत करना चाहिए।उन्होंने भगत सिंह के जीवन की उस भावनात्मक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि जब परिवार में विवाह की चर्चा हुई तो भगत सिंह ने व्यक्तिगत जीवन के सुख की बजाय देश की स्वतंत्रता को अपना जीवन-ध्येय चुना। उन्होंने अपने परिवार और निजी इच्छाओं से ऊपर राष्ट्र को रखा। यह घटना बताती है कि उनके लिए देशभक्ति केवल भावना नहीं, बल्कि जीवन का संकल्प थी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज देश को अपने जीवन का बलिदान देने वाले युवाओं की नहीं, बल्कि अपने समय, प्रतिभा, ज्ञान और ईमानदार मेहनत को देश के विकास के लिए समर्पित करने वाले युवाओं की आवश्यकता है।एडवोकेट सुनील गर्ग ने कहा कि स्कूल का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को परीक्षाओं के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार, संवेदनशील, अनुशासित और राष्ट्रहित को समझने वाला नागरिक बनाना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भगत सिंह को केवल तस्वीरों और नारों तक सीमित न रखें, बल्कि उनके अध्ययन के प्रति समर्पण, साहस, अनुशासन, प्रश्न करने की क्षमता और राष्ट्रप्रेम को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। स्कूल की डायरेक्टर सुनीता गर्ग ने कहा कि शहीद भगत सिंह का जीवन भारतीय युवाओं के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने कहा कि भगत सिंह ने बहुत कम आयु में यह सिद्ध कर दिया था कि किसी व्यक्ति की उम्र नहीं, बल्कि उसके विचार और संकल्प उसकी पहचान बनते हैं। उनका जीवन युवाओं को सिखाता है कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए साहस के साथ-साथ शिक्षा, विवेक और सकारात्मक सोच भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही कल के डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक, उद्यमी, प्रशासक और राष्ट्र के नेतृत्वकर्ता बनेंगे। इसलिए उनमें बचपन से ही राष्ट्रप्रेम, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि भगत सिंह के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम अपने क्षेत्र में पूरी ईमानदारी और मेहनत से श्रेष्ठ कार्य करें और देश को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भगत सिंह के जीवन से जुड़े प्रसंगों, उनके विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को जाना। स्कूल परिसर में प्रस्तुत किए गए स्लोगन एवं चार्ट विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम के अंत में स्कूल प्रबंधन ने कहा कि इतिहास को केवल पढ़ना नहीं, उससे प्रेरणा लेना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने के साथ-साथ उनमें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी, सामाजिक संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। डा. सैफुद्दीन किचलू पब्लिक स्कूल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उन्हें जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में निरंतर ऐसे शैक्षणिक एवं प्रेरणात्मक कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।

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