पिछले दिनों हुई बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने क्षेत्र के किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। मोगा जिला के कोट इसे खां कस्बे के अंतर्गत आने वाले 16 गांवों में इस प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है, जहां करीब 5 हजार एकड़ में खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। खेतों में गेहूं की फसल अब मलबे में तब्दील हो चुकी है। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई करते हुए 10 विशेष टीमों का गठन किया। इन टीमों ने प्रभावित गांवों का दौरा कर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट खेती-बाड़ी विभाग को सौंप दी है। विभाग ने इस रिपोर्ट को संकलित कर अंतिम मंजूरी और मुआवजे की सिफारिश के लिए राज्य सरकार को भेज दिया है। खेती-बाड़ी विभाग के अनुसार सबसे अधिक नुकसान कोट इसे खां के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हुआ है। प्रभावित गांवों में कोट सदर खां, कडियाल, नूरपुर हकीमां, बाजेके, कैला, चीमा, मौजगढ़, बाकरवाला, मंझली, शेरपुर तोयबां, सैद जलालपुर, रेडवां, बस्ती चिराग शाह वाला, रसूलपुर, भोएपुर और सांघला शामिल हैं।किसानों के अनुसार ओलों का आकार इतना बड़ा था कि उन्होंने न केवल फसलों को जमीन पर गिरा दिया, बल्कि पौधों के तनों को भी तोड़ दिया। कई किसानों ने बताया कि फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन एक घंटे की बारिश और ओलों ने पूरी मेहनत बर्बाद कर दी।
विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक प्रभावित गांवों में 80% से 100% तक फसल नुकसान हुआ है। राजस्व अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों की संयुक्त टीमों ने खेतों का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है, जिसे चंडीगढ़ मुख्यालय भेज दिया गया है। किसान अब सरकार से जल्द मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। BKU किसान यूनियन के नेता बलोर सिंह ने मांग की है कि प्रति एकड़ कम से कम 60 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही फसल ऋण की किस्तों को स्थगित करने की भी मांग की है। फिलहाल, 16 गांवों के किसान आर्थिक राहत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि सरकार जल्द सहायता जारी करती है, तो प्रभावित किसानों को अगली फसल की बुवाई के लिए सहारा मिल सके
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