शहर की प्रमुख शिक्षण संस्था द लर्निंग फील्ड ए ग्लोबल स्कूल (टी.एल.एफ) की मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन प्रवीण गर्ग, चेयरमैन इंजी. जनेश गर्ग व डायरेक्टर डा.मुस्कान गर्ग के दिशा-निर्देशों पर आज स्कूल में बैसाखी का पर्व बड़े उत्साह और पारंपरिक रंग-रूप के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम की शुरूआत विशेष प्रार्थना सभा से हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने बैसाखी के उपलक्ष्य में इस पर्व के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसमें पंजाबी लोकगीत, गिद्धा और भांगड़ा ने पूरे परिसर को उत्सव के रंग में रंग दिया। इस अवसर पर स्कूल परिसर को फूलकारियों, पतंगों और पंजाब की फसल कटाई से जुड़े चार्ट्स से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय हो गया। इस दौरान विशेष प्रार्थना सभा की शुरुआत प्रार्थना से हुई, जिसके बाद विद्यार्थियों ने बैसाखी के महत्व पर भाषण प्रस्तुत किया। इस दौरान वर्ष 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना और फसल कटाई की खुशी को विशेष रूप से उजागर किया गया। प्राथमिक वर्ग के विद्यार्थी रंग-बिरंगे पारंपरिक पंजाबी परिधानों में सजे हुए थे। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने ऊजार्वान भांगड़ा और मनमोहक गिद्धा प्रस्तुत किया। इसके साथ ही लोकगीत और किसानों को समर्पित कविताओं का पाठ भी किया गया, जिसने सभी का मन मोह लिया। इस मौके पर स्कूल के चेयरमैन इंजी. जनेश गर्ग ने अपने संबोधन में कहा कि बैसाखी हमें अपनी जड़ों, संस्कृति और किसानों की मेहनत से जोड़ती है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को परंपरा के साथ नवाचार का महत्व समझाते हैं। चेयरमैन इंजी. जनेश गर्ग ने अपने संबोधन में सभी को बैसाखी पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बैसाखी हमें कृतज्ञता और मेहनत का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने न केवल उत्साह और खुशी लाई, बल्कि युवाओं में सांस्कृतिक गौरव और पहचान की भावना पैदा करने में भी मदद की। यह बैसाखी के उत्सव के गहरे मूल्यों और रीति-रिवाजों की एक सुंदर याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि बैसाखी वैशाख महीने के पहले दिन को चिह्नित करती है और पारंपरिक रूप से हर साल 14 अप्रैल को मनाई जाती है। यह त्योहार मुख्य रूप से पंजाब और उत्तर भारत में बसंत के बाद रबी की फसल के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि बैसाखी का त्यौहार मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है। बैसाखी का त्यौहार हर साल मेष संक्रांति के दिन मनाया जाता है। इस दिन जब फसलें पक जाती हैं तो उनकी कटाई शुरू हो जाती है। दसवें सिख गुरु गोबिंद सिंह ने 13 अप्रैल 1699 को बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि बच्चों को सभी त्योहारों के महत्व के बारे में जानकारी होनी चाहिए तथा उनमें भाईचारे की भावना पैदा की जानी चाहिए। इसलिए विद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समय-समय पर सभी प्रकार की गतिविधियों का आयोजन करता है। इस मौके पर डायरेक्टर डा.मुस्कान गर्ग ने सभी को बैसाखी पर्व की बधाई दी तथा कहा कि बैसाखी खुशियों का त्योहार है। हम सभी को एकजुट होकर यह त्योहार मनाना चाहिए तथा यह दिन सभी के लिए गर्व और खुशी की भावना लेकर आया। इस कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस मौके पर स्कूल के विद्यार्थी व अध्यापक मौजूद थे।

