नगर कौंसिल चुनावों से पहले सियासत अपने चरम पर है, लेकिन गांव कोठे अठ चक्क में आम आदमी पार्टी की एक फैसले ने पूरा खेल पलट कर रख दिया। गांव का नाम बदलने की कोशिश अब आप के लिए सियासी आत्मघाती कदम साबित हो रही है।
“कोठे अठ चक्क” का नाम बदलकर “बलदेव सिंह वाला” करने के फैसले ने गांववासियों में ऐसा गुस्सा भड़काया कि लोगों ने न सिर्फ विरोध किया, बल्कि सड़कों पर उतरकर नाम वाले बोर्ड तक उखाड़ दिए। यह विरोध सीधे तौर पर आप नेतृत्व के खिलाफ जनाक्रोश में बदल गया।
इस विवाद के बाद अब आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी से जुड़े कई परिवारों ने एक झटके में ‘झाड़ू’ छोड़कर शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया। इसे चुनावों से पहले आप के लिए बड़ा सियासी नुकसान माना जा रहा है।
पूर्व ब्लॉक प्रधान जग रूप सिंह, जो खुद को आप का फाउंडर सदस्य बताते हैं, ने खुलकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधायक सरबजीत कौर मानूंके ने बिना किसी सलाह-मशवरे के गांव की पहचान से छेड़छाड़ की, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हुईं और पार्टी के अंदर ही नाराजगी फूट पड़ी।
इस मौके पर अकाली दल ने मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पूर्व विधायक एस.आर. क्लेर के नेतृत्व में हुए कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने पार्टी जॉइन कर ताकत का प्रदर्शन किया। गांव में हुए इस शक्ति प्रदर्शन को आने वाले चुनावों से पहले अकाली दल की बड़ी बढ़त के तौर पर देखा जा रहा है।
अकाली नेता सिवराज सिंह ने सीधे तौर पर सत्ताधारी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि यह घटना दिखाती है कि सरकार को अपने ही कार्यकर्ताओं और जनता की भावनाओं की कोई परवाह नहीं है।
एस.आर. क्लेर ने भी आप पर हमला बोलते हुए कहा कि गांव का नाम केवल एक शब्द नहीं, बल्कि उसकी पहचान और इतिहास होता है, जिसे बदलने की कोशिश जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।
गांववासियों ने साफ संदेश दे दिया है कि वे अब ऐसे फैसलों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होंगे और आने वाले चुनावों में इसका जवाब वोट के जरिए देंगे।

