पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ अकाली नेता परमिंदर सिंह ढींडसा ने कहा कि पंजाब के मुद्दों पर भाजपा को गंभीरता दिखानी चाहिए, तभी अकाली दल पुर्नगठित आगे की रणनीति ( संभावित गठबंधन) पर विचार कर सकता है । ढींडसा ने स्पष्ट किया कि यदि भाजपा पंजाब में अपनी जमीन मजबूत करना चाहती है, तो उसे राज्य की समस्याओं के प्रति गंभीरता दिखानी होगी। यदि केंद्र की सत्ताधारी पार्टी पंजाब के मसलों को हल करने के लिए ईमानदारी से आगे कदम बढ़ाती है, तभी इस विषय पर उनकी पार्टी में विचार किया जा सकता है।
– केंद्र के सहयोग के बिना पंजाब का विकास संभव नहीं-
उन्होंने कहा कि पंजाब की बड़ी और जटिल समस्याओं का समाधान केंद्र सरकार के सहयोग के बिना मुमकिन नहीं है। ढींडसा के मुताबिक चाहे राज्य में मौजूदा आम आदमी पार्टी की सरकार हो या भविष्य में आने वाली कोई अन्य सरकार, पंजाब के हितों और विकास के लिए हर किसी को केंद्र सरकार से सहयोग मांगना ही पड़ता है।उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की तरक्की और लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच सकारात्मक तालमेल होना बेहद जरूरी है।
– वारिस पंजाब दे, से हो सकती है बात — एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वारिस पंजाब दे पार्टी के साथ बातचीत टूटना दुर्भाग्यपूर्ण रहा है । कोशिश थी कि सभी पंथक शक्तियां एक मंच पर आएँ । यदि लोग चाहेंगे तो भविष्य में इकट्ठे हो सकते हैं । राजनीति में किसी पहलू का अंत नहीं होता है और दरवाज़े खुले रहते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं (कॉकरोच जनता पार्टी के संदर्भ) का जिक्र करते हुए कहा कि यह जनता के अंदर के गुस्से, फ्रस्ट्रेशन (कुंठा) और रोष को बाहर निकालने का एक जरिया है, जिसे वे इस मंच के माध्यम से जाहिर करने की कोशिश कर रहे हैं। इस पीड़ा से लोग खुद को कनेक्ट कर रहे हैं ।
– नामांकन पत्र रद्द करना लोकतंत्र की हत्या
परमिंदर सिंह ढींडसा ने कौंसिल चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि नामांकन पत्रों को गलत तरीके से रद्द करना सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है। इस मौक़े पर अमनबीर सिंह चैरी, प्रितपाल सिंह हांडा, चमकौर सिंह, गुरचरण सिंह धालीवाल आदि मौजूद थे ।
फोटो । सुनाम में चुनाव प्रचार के दौरान परमिंदर सिंह ढींडसा ।

