ब्रह्मलीन स्वामी वेदान्तानंद जी महाराज की पावन तपोस्थली एवं ब्रह्मलीन स्वामी सहज प्रकाश जी महाराज की कर्मस्थली गीता भवन, मोगा में गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के तत्वावधान में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं के अनुरूप अत्यंत भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। कथा के समापन अवसर पर प्रात:काल विधिवत हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें यजमानों एवं श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य यज्ञ अग्नि में आहुतियां अर्पित कर विश्व शांति, राष्ट्र कल्याण एवं मानवता के मंगल की कामना की। हवन-यज्ञ के उपरांत श्रीमद्भागवत महापुराण का पूजन, विद्वान आचार्यों एवं ब्राह्मणों का सम्मान तथा संत-महापुरुषों का आशीर्वाद प्राप्त किया गया। इसके पश्चात गीता भवन परिसर में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। भंडारे में सभी वर्गों, आयु समूहों एवं समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया, जिससे समरसता, समानता और भाईचारे का अद्भुत संदेश देखने को मिला। इस अवसर पर गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग ने कहा कि सनातन धर्म में भंडारे की परंपरा केवल भोजन कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा, त्याग, परोपकार और मानवता के प्रति समर्पण का महान उत्सव है। हमारे शास्त्रों में ह्लअन्नदान महादानह्व कहा गया है, क्योंकि अन्नदान से न केवल शरीर की तृप्ति होती है, बल्कि आत्मिक संतोष और पुण्य की भी प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में भंडारा प्रेम, सहयोग और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। जब सभी लोग जाति, वर्ग, पद और प्रतिष्ठा के भेदभाव से ऊपर उठकर एक पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं, तब वास्तविक सामाजिक समरसता का दर्शन होता है। यही सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है, जो सम्पूर्ण विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम् अर्थात संपूर्ण विश्व एक परिवार हैह्व का संदेश देती है। एडवोकेट सुनील गर्ग ने कहा कि गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी वर्षों से धर्म, सेवा, संस्कार और समाज कल्याण के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाती आ रही है। ब्रह्मलीन स्वामी वेदान्तानंद जी महाराज एवं ब्रह्मलीन स्वामी सहज प्रकाश जी महाराज द्वारा स्थापित सेवा और आध्यात्मिकता की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ट्रस्ट निरंतर धार्मिक, सामाजिक एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा, हवन-यज्ञ और भंडारे जैसे आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागृति के साथ-साथ सेवा और संस्कारों की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पुरुषोत्तम मास में आयोजित इस सात दिवसीय कथा महोत्सव में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति यह दशार्ती है कि समाज आज भी धर्म, संस्कृति और संतों की शिक्षाओं के प्रति गहरी आस्था रखता है। कथा के माध्यम से जहां लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त हुआ, वहीं हवन-यज्ञ और भंडारे के माध्यम से सेवा, समर्पण और लोकमंगल का संदेश भी जन-जन तक पहुंचा। समापन अवसर पर गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के महामंत्री अंशुल श्रीकुंज, जॉइंट सेक्रेटरी सुरेंद्र गोयल, सीनियर उपाध्यक्ष रविंद्र सूद, उपाध्यक्ष भरत अग्रवाल, कैशियर योगेश गर्ग सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी एवं गणमान्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने कथा की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे आध्यात्मिक चेतना, धार्मिक जागरण और सामाजिक एकता का प्रेरणादायी आयोजन बताया। भक्ति, सेवा और संस्कारों से ओतप्रोत यह आयोजन एक बार फिर सिद्ध कर गया कि गीता भवन, मोगा केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक जागरण, सामाजिक समरसता और मानव सेवा का एक सशक्त केंद्र है, जो समाज को धर्म और संस्कृति की अमूल्य धरोहर से निरंतर जोड़ रहा है।

