राज्य की प्रमुख शिक्षण संस्था आई.एस.एफ.कालेज आफ फार्मेसी के डायरेक्टर डा.जी.डी.गुप्ता ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि फार्मेसी में छात्रों को भविष्य बनाने के लिए अपार संभावनाएं हैं, जो छात्र 12 वीं मैथमैटिक्स या बायोलाजी विषय के साथ साइंस में 50 प्रतिशत से अधिक अंक लाकर उत्तीर्ण होते हैं वह डी.फार्म दो वर्ष का प्रोग्राम, बी.फार्म चार वर्ष का प्रोग्राम,फार्म.डी. प्रोग्राम छह वर्ष में एडमीशन को लेकर सरकारी एवं प्राइवेट सेक्टर के साथ-साथ स्वयं के रोजगार को करने की देश एवं विदेश में अपार संभावनाएं हैं। भारत की फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री पूरे विश्व के अंदर पहचान बनाती है व यह कहा जाता है कि हर तीसरा फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट भारत के द्वारा निर्मित होता है। डा.गुप्ता ने कहा कि इन विषयों को करके छात्र हायर एजुकेशन, पी.एच.डी. जैसे प्रोग्राम करके रिसर्च एवं तकनीकी क्षेत्र में कार्य करने के लिए सक्षम होते हैं व पूरे देश में फार्मेसी के छात्रों की मांग निरंतर बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि फार्मेसी करने के बाद छात्रों को दवाईयों के निर्माण, गुणवत्ता नियंकत्रण, उत्पादन, क्वालिटी इंशोरेंस, अनुसंधान एवं विकास, अस्पतालों में फार्मासिस्सट. दवाईयों के दुष्प्रभाव की निगरानी फार्मा-कोविजिलेंस, क्लीनिकल रिसर्च, क्लीनिकल ट्रायल, मेडिकल स्टोर, शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर, वैकसीन के साथ-साथ अन्य कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें छात्र भविष्य को उज्जवल बना सकते हैं। यह देखने योग्य है कि एडमीशन लेने से पहले संस्थान में उपयुक्त सुविधाएं, उपकरण, लैब्स के साथ-साथ वहां पर कार्य करने वाले शिक्षकगणों को अवश्य देखना चाहिए। साथ-साथ प्लेसमेंट की जानकारी के बाद एडमीशन लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार एवं राज्य सरकारें गुणवत्ता पूर्ण हेल्थ केयर सिस्टम को सुदृढ़ बनाने के लिए फार्मासिस्ट की भूमिका को अहम बना रही है। यह एक ऐसा प्रोफेशन है कि छात्र सरकारी, प्राइवेट, स्वरोजगार, रिसर्च सेंटर, टेस्टिंग लैब से लेकर की बड़े उद्योगों के लिए काबिल हो जाता है।

