मोगा के सरकारी अस्पताल में एक डॉक्टर पर डिलीवरी के दौरान कथित लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया गया है। मृतका के परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर द्वारा डिलीवरी के समय गलत ऑपरेशन किए जाने के कारण महिला की हालत बिगड़ गई। इसके बाद उसे इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतका की पहचान सुखप्रीत कौर उम्र 20 साल निवासी खोसा पांडो रूप में हुई हे। महिला की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने मोगा सिविल अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर शनिवार देर शाम धरना देकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित डॉक्टर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की।
मृतका महिला के पति जसकरण सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी सुखप्रीत कौर को प्रसव के लिए 24 जून की सुबह मोगा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया था। उसी रात करीब 10:30 बजे उनकी पत्नी ने एक बच्ची को जन्म दिया। उनके अनुसार उस समय मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ थे। जसकरण सिंह ने आरोप लगाया कि रात में अचानक उनकी पत्नी की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें हृदय संबंधी समस्या हो गई है और उन्हें फरीदकोट रेफर करना होगा। 25 जून की सुबह उनकी पत्नी को फरीदकोट मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि वहां डॉक्टरों ने सभी जरूरी जांच और स्कैनिंग की, जिसमें कथित तौर पर पता चला कि ऑपरेशन के दौरान यूरिन और रक्त की नसें गलत तरीके से कट गई थीं। इसके बाद उनकी पत्नी का लगातार इलाज चलता रहा, लेकिन 1 जुलाई को उनकी मृत्यु हो गई।
जसकरण सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी का ऑपरेशन डॉ. उपिंदर सिंह ने किया था और डॉक्टर की लापरवाही के कारण ही उनकी पत्नी की जान गई। उन्होंने कहा कि वह मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनकी पहले से एक दो साल की बेटी है और अब दूसरी बेटी के जन्म के कुछ ही दिनों बाद दोनों बच्चियों के सिर से मां का साया उठ गया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. गगनदीप सिंह ने बताया कि डिलीवरी के बाद महिला की हालत गंभीर होने के कारण उसे फरीदकोट रेफर किया गया था। उन्होंने कहा कि हमने परिवार के साथ बातचीत की है और उन्हें पोस्टमार्टम कराने के लिए कहा है, ताकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल परिवार को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया गया है।

