एल.डी.सी.ए) नीति के विरोध में पंजाब एवं हरियाणा की जिला एवं तहसील बार एसोसिएशनों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन को अब नया और निर्णायक बल मिल गया है। बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा ने भी अधिवक्ताओं की मांगों का समर्थन करते हुए आंदोलन के पक्ष में ठोस कदम उठाए हैं। इससे पूरे प्रदेश के अधिवक्ताओं में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार हुआ है। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं मोगा बार एसोसिएशन के कई बार प्रधान रह चुके एडवोकेट सुनील गर्ग ने कहा कि बाघा पुराना में उन्होंने जो बात कही थी कि यदि बार काउंसिल, सभी बार एसोसिएशनें और अधिवक्ता एक मंच पर आ जाएं तो इस आंदोलन का समाधान शीघ्र संभव है, अब वही स्थिति बनती दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के सदस्य जी.पी. रंधावा, रजनी नंदा, रजिंदर जनेजा, मीना शर्मा तथा करणजीत सिंह ने अधिवक्ताओं को जानकारी दी कि बार काउंसिल आफ इंडिया से आवश्यक अनुमति हासिल करने के उपरांत बार कौसिल पंजाब, हरियाणा एंड चंडीगढ़ ने अपना जनरल हाउस आयोजित किया, जिसमें एलडीसीए नीति का सर्वसम्मति से विरोध करते हुए प्रस्ताव (रेज़ोल्यूशन) पारित किया गया। इसके उपरांत बार काउंसिल के प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की। साथ ही बार काउंसिल के सदस्यों ने हाईकोर्ट के चार माननीय न्यायाधीशों के साथ विस्तृत बैठक कर एलडीसीए नीति से उत्पन्न व्यावहारिक कठिनाइयों, अधिवक्ताओं की चिंताओं तथा संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में अधिवक्ताओं के सुझावों को गंभीरता से सुना गया तथा इस नीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता पर बल दिया गया। एडवोकेट सुनील गर्ग ने कहा कि अब आवश्यकता पूरे अधिवक्ता समुदाय के अनुभवों और सुझावों को एक मंच पर लाने की है। उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा के सभी अधिवक्ताओं से अपील की कि वे एलडीसीए नीति के संबंध में अपने व्यावहारिक, कानूनी एवं रचनात्मक सुझाव बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा, अपनी-अपनी जिला एवं तहसील बार एसोसिएशनों तथा उनके ई-मेल Suniladv2000@yahoo.co.in पर भी भेजें। इन सुझावों को संकलित कर एक व्यापक एवं व्यवहारिक प्रस्ताव तैयार किया जाएगा, जिसे बार काउंसिल के माध्यम से माननीय न्यायाधीशों के समक्ष रखा जाएगा, ताकि इस विवाद का व्यावहारिक एवं स्थायी समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के आंदोलन में औपचारिक रूप से शामिल होने से इस संघर्ष को नई दिशा और मजबूती मिली है। यदि बार काउंसिल, सभी जिला एवं तहसील बार एसोसिएशनें तथा अधिवक्ता समुदाय इसी प्रकार संगठित रहकर कार्य करेंगे तो एलडीसीए नीति पर सकारात्मक एवं शीघ्र निर्णय संभव होगा। एडवोकेट सुनील गर्ग ने इस अवसर पर जिला बार एसोसिएशन मोगा के सभी पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्यों एवं समस्त अधिवक्ताओं की विशेष सराहना करते हुए कहा कि मोगा बार शुरू से ही इस आंदोलन में पूरी सक्रियता, अनुशासन और एकजुटता के साथ अग्रणी भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि मोगा बार का सहयोग पूरे प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है और इस सामूहिक संघर्ष को मजबूत आधार प्रदान कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि आज आयोजित जनरल हाउस की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अधिवक्ताओं का “नो वर्क” और हड़ताल जारी रहेगी तथा इसे तब तक जारी रखा जाएगा, जब तक एलडीसीए नीति के संबंध में कोई व्यावहारिक, न्यायसंगत और सर्वमान्य समाधान नहीं निकल जाता। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन अधिवक्ताओं एवं न्यायिक व्यवस्था दोनों के हितों की रक्षा के लिए इस मुद्दे का सम्मानजनक समाधान अत्यंत आवश्यक है। अंत में एडवोकेट सुनील गर्ग ने विश्वास व्यक्त किया कि बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा, सभी जिला एवं तहसील बार एसोसिएशनें और अधिवक्ता समुदाय यदि इसी प्रकार एकजुट रहकर सकारात्मक संवाद और ठोस सुझावों के साथ आगे बढ़ते रहे, तो एलडीसीए नीति का शीघ्र, व्यावहारिक और सम्मानजनक समाधान अवश्य निकलेगा तथा न्यायिक कार्य भी सामान्य रूप से पुनः प्रारंभ हो सकेंगे।

