गीता भवन में गुरु पूर्णिमा महोत्सव : श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की झांकी से भक्तिरस में सराबोर हुए श्रद्धालु

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ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव पूज्यपाद स्वामी वेदांतानंद जी महाराज एवं ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी सहज प्रकाश जी महाराज की पावन तपोभूमि गीता भवन, मोगा में गीता भवन ट्रस्ट सोसाइटी द्वारा गुरु पूर्णिमा महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा के पांचवें दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के दौरान गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य हवन यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर विश्व शांति, सर्वभले एवं मानव कल्याण की मंगलकामना की। इसी अवसर पर शालिग्राम भगवान का दिव्य पंचामृत अभिषेक, पूजन एवं आराधना सम्पन्न हुई। साथ ही हरिद्वार से पधारे गीता भवन ट्रस्ट सोसाइटी के महासचिव अंशुल श्रीकुंज का भी श्रद्धापूर्वक पूजन एवं सम्मान किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ गीता भवन ट्रस्ट सोसाइटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग, महासचिव अंशुल श्रीकुंज, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रविंदर सूद, कनिष्ठ उपाध्यक्ष भरत कुमार अग्रवाल, सहसचिव सुरिंदर गोयल, कोषाध्यक्ष योगेश गर्ग, ट्रस्टी एडवोकेट मनविंदर सग्गू, एडवोकेट कृष्ण मुरारी गुप्ता तथा अन्य पदाधिकारियों द्वारा श्रीमद्भागवत पूजन एवं मंगलाचरण के साथ किया गया। आज के मुख्य यजमान श्री शिवनंदन, श्री नरेश गोयल एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रिजू गोयल रहे। हवन यज्ञ के दौरान कथा व्यास पूज्य स्वामी विज्ञनानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि यज्ञ केवल अग्नि में आहुति अर्पित करने की परंपरा नहीं, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ और द्वेष जैसी बुराइयों को त्यागने का संकल्प है। श्रद्धा, विश्वास और निष्काम भाव से किया गया यज्ञ मनुष्य के जीवन को पवित्र एवं मंगलमय बनाता है तथा वातावरण के साथ-साथ मन और आत्मा का भी शुद्धिकरण करता है।

इसके उपरांत कथा व्यास ने श्रीमद्भागवत कथा का अमृतपान कराते हुए भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतार, बाल लीलाओं एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण एवं जीवंत वर्णन किया। जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग आया, पूरा कथा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की”, “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भजनों एवं संकीर्तन पर झूम उठे और सम्पूर्ण वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान श्रीकृष्ण के 101 पावन नामों का उच्चारण एवं स्तुति कर वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया। पूज्य स्वामी विज्ञनानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण केवल एक अवतार नहीं, बल्कि धर्म, प्रेम, करुणा, नीति, त्याग और निष्काम कर्म के साक्षात स्वरूप हैं। जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान मानवता के कल्याण के लिए अवतरित होते हैं। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को ईश्वर से जोड़ने, जीवन को पवित्र बनाने तथा भक्ति, सेवा और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है। इस अवसर पर गीता भवन ट्रस्ट सोसाइटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा माना गया है, क्योंकि गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का सम्पूर्ण जीवन सत्य, धर्म, कर्तव्य, प्रेम, सेवा और निष्काम कर्म की अनुपम शिक्षा देता है।श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने मानवता को कर्मयोग का ऐसा अमर संदेश दिया, जो आज भी प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का सर्वोत्तम मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में सद्गुरु के बताए मार्ग पर चलते हुए श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपनाना चाहिए। यही गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश है। उन्होंने कहा कि गीता भवन ट्रस्ट सोसाइटी वर्षों से कथा, सत्संग, यज्ञ एवं सेवा कार्यों के माध्यम से आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रही है तथा सभी अभिभावकों को अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ना चाहिए। महासचिव अंशुल श्रीकुंज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म, अन्याय पर न्याय और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का शाश्वत संदेश है। श्रीमद्भागवत कथा का उद्देश्य केवल कथा सुनना नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम, सेवा, त्याग, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने परिवार एवं नई पीढ़ी को भारतीय आध्यात्मिक विरासत से जोड़ें, ताकि संस्कारों की यह अमूल्य धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके। उन्होंने बताया कि 28 जुलाई तक प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे से सायं 6:30 बजे तक संगीतमय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा का आयोजन होगा, जबकि 29 जुलाई को प्रातः 11 बजे व्यास पूजन, गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से परिवार सहित उपस्थित होकर पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की। कथा के समापन पर श्रद्धालु श्रीकृष्ण भक्ति में लीन होकर भजनों एवं संकीर्तन पर झूमते रहे। सम्पूर्ण गीता भवन परिसर गुरु महिमा, श्रीकृष्ण प्रेम, भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दिया।

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