इंसुलिन रजिस्ट्रेंस एक साइलेंट स्थिति है, जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाती और ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। जिस कारण बिना वजह थकान, पेट के आसपास चर्बी का बढ़ना, मीठा खाने की तीव्र इच्छा होना प्रमुख संकेत दिखाई देते हैं। यदि इसका समय पर उपचार न किया जाए तो यह टाइप-2 डायबिटीज, फैटीलीवर और हृदय रोगों का आधार बनता है। उक्त जानकारी शाम नर्सिंग होम के एम.डी. डा.सीमांत गर्ग ने आज मोगा के कश्मीरी पार्क में राम योग परिवार के समूह सदस्यों को इंसुलिन के बारे में विस्तार से दी। डा.सीमांत गर्ग ने कहा कि प्राथमिक जांच में यदि इंसुलिन रजिस्ट्रेंस का पता चलता है तो हम इसको जीवनशैली में सुधार करके नियंत्रित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इंसुलिन हमारे शरीर के अग्नाशय द्वारा बनाया गया एक हारमोन है, इसका मुख्य कारण हमारे द्वारा खाए गए भोजन को ऊर्जा में बदलना है। यह एक चाबी की तरह कोशिकाओं के दरवाजे खोलता है, ताकि गुलूकोज अंदर जाकर ऊर्जा दे सके। यदि कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सुस्त हो जाती है तो परिणाम स्वरूप अगनाशय और अधिक इंसुलिन बनाना पड़ता है, ताकि गुलूकोज कोशिकाओं के अंदर जा सके तथा ब्लड शुगर का लेवल सामान्य कर सके। उन्होंने कहा कि इंसुलिन रजिस्ट्रेंस के प्रति विशेषज्ञों का मानना है कि गलत खान-पान की आदतें जैसे देर रात डीनर करना तथा हाईकाब्रोडेंट वाला भोजन लेना इसका मुख्य कारण है। जिस कारण शरीर देर रात खाए गए खाने को ऊर्जा में बदलने की बजाए फैट के रूप में स्टोर करने लगता है तो हमारी माशपेशिया इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि नींद की कमी और तनाव से शरीर में कोर्टिसोल बढ़ जाता है, जो इंसुलिन रजिस्ट्रेंस को बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि अत्याधिक भूख और मीठा खाने की तलब, भोजन के बाद सुस्ती, नींद आना, भारीपन महसूस होना, गर्दन के पीछे बगलों या कहुूनियों पर त्वाचा का काला पड़ना, गर्दन व शरीर पर छोटे-छोटे मस्से निकलना, बार-बार पेशाब आना तथा धुंधली दृष्टि से आंखों पर दबाव बढ़ना आदि लक्ष्ण हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे बचाव के लिए हमें नींद पर्याप्त मात्रा में लेते हुए तनाव से मुक्त रहना चाहिए तथा संतुलित आहार लेना चाहिए, जिसमें हरी सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर युक्त वस्तुएं बनानी चाहिए। प्रतिदिन व्यायाम, सैर करना, साइकिल चलाना, योग करने से शरीर की इंसुलिन रजिस्ट्रेंस की कार्यक्षमता सुधरती है। उन्होंने कहा कि डाक्टर की सलाह के अनुसार समय पर चेकअप करवाते रहना चाहिए तथा शुरू की गई इंसुलिन थैरेपी को नियमित रूप से लेते रहना चाहिए, यह प्रभावी और सुरक्षित उपचार साबित हो सकता है, इससे घबराना नहीं चाहिए। इस अवसर पर श्री राम योग परिवार के समूह पदाधिकारियों द्वारा इंसुलिन रजिसट्रैंस के प्रति दी गई जानकारी के लिए समूह सदस्यों ने उनका धन्यवाद किया।

