ब्रह्मलीन परमपूज्य स्वामी वेदान्तानंद जी महाराज की पावन तपोस्थली गीता भवन, मोगा में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के उपलक्ष्य में गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी द्वारा आयोजित आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ मंगलवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं के अनुरूप भव्य एवं दिव्य वातावरण में संपन्न हुआ। कथा के अंतिम दिवस गीता भवन श्रद्धालुओं के अपार सैलाब से भर उठा। संपूर्ण परिसर भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति रस से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर अपने जीवन को धर्म, संस्कार और सेवा के मार्ग पर चलाने का संकल्प लिया। समापन अवसर पर वैदिक विधि-विधान से यज्ञ एवं पूर्णाहुति संपन्न हुई। यजमानों एवं श्रद्धालुओं ने यज्ञाग्नि में आहुतियां अर्पित कर विश्व शांति, राष्ट्र की समृद्धि, मानव कल्याण और सनातन संस्कृति की अखंड उन्नति की प्रार्थना की। पूर्णाहुति के उपरांत श्रद्धालुओं को महाकुम्भ का पावन जल, प्रसाद तथा यजमान परिवारों को नारियल भेंट कर सम्मानित किया गया। भक्तों के चेहरों पर आध्यात्मिक संतोष और भक्ति का अनुपम भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
कथा व्यास पूज्य स्वामी विज्ञनानंद सरस्वती जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अमर मित्रता का अत्यंत मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि सच्चा संबंध कभी धन, पद या वैभव का मोहताज नहीं होता। प्रेम, विश्वास, त्याग और समर्पण ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत मनुष्य को केवल ईश्वर से नहीं जोड़ती, बल्कि उसे श्रेष्ठ चरित्र, आदर्श जीवन, परिवार में संस्कार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा भी देती है। उनके प्रवचनों और भजनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर ब्लूमिंग बड्स स्कूल के चेयरमैन डॉ. संजीव कुमार सैनी ने भी संत-महापुरुषों का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा विद्वान आचार्यों एवं ब्राह्मणों का सम्मान कर भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग ने अपने अत्यंत भावपूर्ण संबोधन में कहा कि गीता भवन में श्रीमद्भागवत कथा सुनने आने वाले श्रद्धालु केवल श्रोता नहीं हैं, बल्कि वे सभी ब्रह्मलीन स्वामी वेदान्तानंद जी महाराज का आध्यात्मिक परिवार हैं। यही परिवार वर्षों से प्रेम, श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रत्येक धार्मिक आयोजन में एकत्र होकर सनातन संस्कृति की ज्योति को प्रज्वलित रखे हुए है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा तभी सार्थक होती है, जब उसके आदर्श हमारे व्यवहार, परिवार और समाज में दिखाई दें। यदि हम भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं, गीता के संदेश और भागवत के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं, तो परिवार संस्कारवान, समाज संगठित और राष्ट्र सशक्त बनेगा। उन्होंने कहा कि आज सनातन संस्कृति के संरक्षण और प्रसार की सबसे बड़ी आवश्यकता है, और गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी इसी संकल्प के साथ धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक चेतना का निरंतर प्रकाश फैला रही है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे केवल कथा सुनकर न जाएं, बल्कि उसके संदेश को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। यही श्रीमद्भागवत की सच्ची साधना और गुरुजनों के प्रति वास्तविक श्रद्धांजलि होगी।ट्रस्ट के महामंत्री अंशुल श्रीकुंज (हरिद्वार) ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी वेदान्तानंद जी महाराज एवं ब्रह्मलीन स्वामी सहज प्रकाश जी महाराज द्वारा स्थापित सेवा, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना की परंपरा को ट्रस्ट पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि गीता भवन आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि समाज में सेवा, सद्भाव, आध्यात्मिक जागरण और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का सशक्त केंद्र बन चुका है। इस अवसर पर ट्रस्ट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रविंदर सूद, कनिष्ठ उपाध्यक्ष भरत कुमार अग्रवाल, सहसचिव सुरिंदर गोयल, कोषाध्यक्ष योगेश गर्ग, ट्रस्टी एडवोकेट मनविंदर सग्गू, एडवोकेट कृष्ण मुरारी गुप्ता सहित ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने इस दिव्य आयोजन को आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति के सुदृढ़ीकरण की दिशा में अत्यंत प्रेरणादायी एवं ऐतिहासिक आयोजन बताया

