गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों के लिए सरकारी अस्पताल आखिरी उम्मीद होते हैं। लेकिन अब इसी अस्पताल में डॉक्टर तक पहुंचने से पहले मरीज को ऐसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, जिसने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहले मरीज अस्पताल पहुंचता था और कुछ ही मिनटों में काउंटर से पर्ची लेकर डॉक्टर के पास पहुंच जाता था। अब मरीज को पहले आधार कार्ड देना होगा, आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर OTP लेना होगा, अस्पताल स्टाफ को OTP बताना होगा, फिर टोकन मिलेगा और उसके बाद दूसरी खिड़की से पर्ची मिलेगी।
यानी बीमारी बाद में, OTP पहले!
सबसे बड़ा सवाल उस मरीज को लेकर है जो इमरजेंसी में अस्पताल पहुंचता है। किसी मरीज को तेज दर्द हो रहा हो, सांस लेने में परेशानी हो या तत्काल डॉक्टर की जरूरत हो—क्या उसे पहले आधार और OTP की प्रक्रिया पूरी करनी होगी?
अगर इस प्रक्रिया में समय निकल गया और मरीज की हालत बिगड़ गई तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
मोबाइल में रिचार्ज नहीं तो क्या इलाज भी नहीं?
सरकार की इस व्यवस्था में एक और बड़ा सवाल है। अगर मरीज के पास मोबाइल नहीं है, मोबाइल बंद है, रिचार्ज नहीं है या आधार से मोबाइल नंबर लिंक नहीं है तो क्या होगा?
सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग इलाज के लिए आते हैं जो तकनीकी प्रक्रिया से परिचित नहीं हैं। ऐसे मरीजों और बुजुर्गों के लिए यह व्यवस्था परेशानी का कारण बन सकती है।
अस्पताल के काउंटर इंचार्ज जतिन के अनुसार लगभग 50 प्रतिशत मरीजों को बिना OTP के भी पर्ची दी जा रही है।
तो सवाल यह है कि अगर बिना OTP पर्ची दी जा सकती है तो फिर बाकी मरीजों को OTP की प्रक्रिया में क्यों उलझाया जा रहा है?
क्या अस्पताल में एक ही काम के लिए दो अलग-अलग नियम चल रहे हैं?
पंजाब सरकार तत्काल करे हस्तक्षेप
बताया जा रहा है कि यह व्यवस्था केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत लागू की गई है। लेकिन पंजाब सरकार और स्वास्थ्य विभाग को भी यह देखना होगा कि किसी केंद्रीय व्यवस्था को लागू करते समय पंजाब के सरकारी अस्पतालों में आने वाले आम मरीजों की सुविधा और जमीनी परिस्थितियों का ध्यान रखा जा रहा है या नहीं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री से मांग है कि इस व्यवस्था की तुरंत समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि डिजिटल प्रक्रिया मरीज के इलाज में बाधा न बने।
इस पूरे मामले को लेकर जब हमने सरकारी अस्पताल के सीएमओ डॉ. मनजिंदर सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि यह मामला उनके ध्यान में नहीं है। उन्होंने इस संबंध में इंचार्ज भूपेंद्र सिंह से बात करने की सलाह दी।
जब भूपेंद्र सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि वह इस समय व्यस्त हैं और पर्ची काउंटर के इंचार्ज जतिन से बात करने को कहा।
जतिन से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि करीब छह महीने पहले केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में आदेश आया था, जिसके बाद अस्पताल में यह सिस्टम लागू किया गया।

