सावन का महीना शुरू होते ही पंजाब की धरती पर तीज की रौनक लौट आती है। इसी समृद्ध पंजाबी विरासत, लोक रंग और पारिवारिक रिश्तों को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से मोगा में महिलाओं द्वारा महिफले तीज नामक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और गिद्धा, बोलियां, भंगड़ा, लोक खेलों तथा पारंपरिक पंजाबी परिधानों के माध्यम से तीज के पुराने रंग को साकार किया। समारोह के दौरान महिलाएं पारंपरिक पंजाबी परिधानों में सज-धजकर पहुंचीं। गिद्धे की बोलियों, हंसी-मजाक और लोक रंगों से पूरा वातावरण तीज के रंग में रंग गया। इस अवसर पर पंजाबी लोक नृत्य की विभिन्न प्रस्तुतियां भी पेश की गईं। पंजाबी संस्कृति में तीज केवल नाचने-गाने का पर्व नहीं, बल्कि बेटियों-बहनों के प्यार, अपनत्व और पारिवारिक रिश्तों की गहरी सांझ का प्रतीक है। सावन के महीने में विवाहित बेटियां अपने मायके आकर माता-पिता के साथ सुख-दुख साझा करती हैं और सहेलियों के साथ तीज की खुशियां मनाती हैं। महिफले तीज समारोह में देशप्रेम का जज्बा भी देखने को मिला। महिलाओं ने तिरंगा फहराकर राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक नमन किया और देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले महान शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया। समारोह के माध्यम से पंजाबी संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ देशप्रेम, भाईचारे और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया। महिफले तीज की एक खास बात यह रही कि खुशियों के इस आयोजन को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा गया। पौधे लगाने, तुलसी के पौधे वितरित करने और लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित करने जैसे प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। इस बार महिफले तीजह्ण को सफल बनाने में वरिंदा मजीठिया, शैली कालड़ा, किरण छाबड़ा, ममता आहूजा, मोनिका, हेमा, सुनीता चोपड़ा, ज्योति अरोड़ा, सपना, ममता कालड़ा, राजविंदर, बबीता, नेहा, किरण, मनीषा कोचर, सोनिया, अंकिता, मधुर गाबा, मीना पाल, नव्या सहित कई महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

