रक्षाबंधन पर पेड़ों को राखी बांध छात्राओं ने दिया प्रकृति संरक्षण का अनूठा संदेश

voice punjabtime
5 Min Read

रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और रक्षा के पवित्र रिश्ते का पर्व नहीं, बल्कि यह हमें हर उस जीवन की रक्षा का संदेश भी देता है, जो हमारे अस्तित्व का आधार है। इसी भावना को एक अनूठी और प्रेरणादायी पहल के माध्यम से डॉ. सैफुद्दीन किचलू पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मोगा के विद्यार्थियों ने जीवंत कर दिया। स्कूल में रक्षाबंधन पर्व को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए छात्राओं ने स्कूल परिसर में खड़े पेड़ों को भाई का स्वरूप मानकर उनकी कलाई पर राखियां बांधीं और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लिया।

स्कूल के चेयरमैन एडवोकेट सुनील गर्ग एवं डायरेक्टर सुनीता रानी गर्ग के मार्गदर्शन में आयोजित इस विशेष गतिविधि में विद्यार्थियों ने स्वयं आकर्षक एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देने वाली राखियां तैयार कीं। इसके बाद छात्राओं ने पेड़ों को राखी बांधकर संकल्प लिया कि वे न केवल पेड़ों की रक्षा करेंगी, बल्कि अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए भी दूसरों को प्रेरित करेंगी।इस अवसर पर विद्यालय परिसर का वातावरण भावनात्मक होने के साथ-साथ अत्यंत प्रेरणादायी दिखाई दिया। छात्राओं ने संदेश दिया कि यदि भाई की कलाई पर बांधा गया रक्षा सूत्र उसकी सुरक्षा का वचन है, तो पेड़ की कलाई पर बांधी गई राखी धरती, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का संकल्प है। पेड़ हमारे जीवन के मौन प्रहरी हैं, जो हमें ऑक्सीजन, छाया, फल, फूल और स्वच्छ वातावरण प्रदान करते हैं। ऐसे में उनकी रक्षा करना केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवीय कर्तव्य भी है। स्कूल के चेयरमैन एडवोकेट सुनील गर्ग ने कहा कि भारतीय त्योहार केवल परंपराओं का निर्वहन नहीं करते, बल्कि उनमें जीवन को दिशा देने वाले गहरे संस्कार और संदेश छिपे होते हैं। उन्होंने कहा, “रक्षाबंधन का रक्षा सूत्र हमें यह याद दिलाता है कि जिसकी हम रक्षा करने का संकल्प लेते हैं, उसके प्रति हमारी जिम्मेदारी भी होती है। आज हमारे विद्यार्थियों ने पेड़ों को राखी बांधकर इस पवित्र भावना का दायरा भाई-बहन के रिश्ते से आगे बढ़ाकर प्रकृति तक पहुंचाया है। पेड़ों की रक्षा करना वास्तव में अपने जीवन, अपने पर्यावरण और अपनी आने वाली पीढ़ियों की रक्षा करना है। अगर हर बच्चा एक पेड़ को अपना भाई या परिवार का सदस्य मानकर उसकी देखभाल करने लगे, तो समाज में पर्यावरण संरक्षण की एक नई क्रांति लाई जा सकती है।” डायरेक्टर सुनीता रानी गर्ग ने विद्यार्थियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का भाव है। आज हमारी बेटियों ने इसी पवित्र भावना को प्रकृति के साथ जोड़कर यह संदेश दिया है कि पेड़ भी हमारे अपने हैं और उनकी रक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है। जिस तरह हम अपने परिवार के सदस्यों की चिंता करते हैं, उसी तरह हमें प्रकृति और पेड़-पौधों की भी देखभाल करनी चाहिए। बच्चों के मन में बचपन से ही प्रकृति के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता पैदा करना ही एक सुरक्षित और हरे-भरे भविष्य की सबसे मजबूत नींव है।” कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने “एक राखी पेड़ के नाम”, “पेड़ बचाओ, जीवन बचाओ” तथा “प्रकृति की रक्षा—हमारी जिम्मेदारी” जैसे संदेशों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाई। उन्होंने पेड़ों को नियमित रूप से पानी देने, उनकी देखभाल करने, पौधे लगाने तथा प्लास्टिक और प्रदूषण को कम करने का भी संकल्प लिया। विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनाना है। रक्षाबंधन की इस अभिनव गतिविधि ने विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति सम्मान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की भावना को भी मजबूत किया।

कार्यक्रम ने यह खूबसूरत संदेश दिया कि रक्षा का बंधन केवल कलाई से नहीं, दिल से जुड़ता है—और जब यह बंधन प्रकृति से जुड़ जाए तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित हो जाता है। इस अवसर पर स्कूल स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम उत्साह, भावनात्मक जुड़ाव और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *