मोगा की नई दाना मंडी में आज विभिन्न जत्थेबंदियों की ओर से भाजपा और आरएसएस के खिलाफ विशाल रोष रैली आयोजित की गई। आयोजकों के अनुसार, रैली में पंजाब के विभिन्न हिस्सों से मजदूरों, किसानों, युवाओं, कर्मचारियों और महिलाओं सहित करीब 30 हजार लोग शामिल हुए। रैली में कॉमरेड सरदारा सिंह माहल, कॉमरेड दर्शन सिंह खटकड़, कॉमरेड कुलविंदर सिंह वड़ैच, शाही इमाम पंजाब मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियाणवी, कीर्ति किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष निर्भय सिंह ढुड्डीके और ग्रामीण मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष तरसेम सिंह पीटर सहित कई नेता मौजूद रहे। रैली को संबोधित करते हुए नेताओं ने भाजपा सरकार और आरएसएस की नीतियों पर निशाना साधा। नेताओं ने आरोप लगाया कि देश में मनुवादी सोच और सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा दलितों, पिछड़े वर्गों, मजदूरों, अल्पसंख्यकों और वामपंथी कार्यकर्ताओं के अधिकारों पर हमला किया जा रहा है। नेताओं ने कहा कि मनरेगा में किए जा रहे बदलाव, चार लेबर कोड लागू करने और सार्वजनिक संस्थानों के निजीकरण जैसी नीतियों का सबसे अधिक असर मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर देश के संघीय ढांचे को कमजोर करने और राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप करने का भी आरोप लगाया। कृषि मुद्दों पर बोलते हुए नेताओं ने कहा कि किसानों के आंदोलन के बाद तीन कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब केंद्र सरकार बड़े स्तर पर क्लस्टर फार्म बनाने की योजनाओं पर काम कर रही है और किसानों तथा आम लोगों को इन नीतियों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है। रैली में नेताओं ने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह रैली केवल विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि एक बड़े संघर्ष का आगाज और चेतावनी है। नेताओं ने कहा कि वे पंजाब में भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए लोगों को लामबंद करेंगे। नेताओं ने पंजाब में भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा पंजाब में अपना आधार मजबूत करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने किसानों और मजदूरों से अपनी मांगों और अधिकारों के लिए एकजुट रहने की अपील की।
रैली के दौरान कुछ नेताओं और किसानों ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों से कृषि क्षेत्र को कॉरपोरेट कंपनियों के हाथों में जाने का खतरा है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में किसान और मजदूर इन नीतियों को ध्यान में रखकर अपना राजनीतिक निर्णय लेंगे।

