शहर की प्रमुख शिक्षण संस्था द लर्निंग फील्ड ए ग्लोबल स्कूल (टी.एल.एफ) की मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन प्रवीण गर्ग, चेयरमैन इंजी. जनेश गर्ग व डायरेक्टर डा.मुस्कान गर्ग के दिशा-निर्देशों पर स्कूल में कक्षा पहली एवं दूसरी के विद्यार्थियों के लिए आईए अपने परिवेश को जानें विषय पर रोचक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधि का आयोजन किया गया। गतिविधि के दौरान विद्यालय परिसर बच्चों के लिए अन्वेषण, अवलोकन और अनुभवात्मक अधिगम के जीवंत केंद्र में बदल गया। विद्यार्थियों ने कक्षा की सीमाओं से बाहर निकलकर अपने आसपास के प्राकृतिक एवं मानवीय परिवेश को करीब से देखा और विभिन्न वस्तुओं, पौधों, स्थानों तथा गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। बच्चों ने अपने आसपास दिखाई देने वाली चीजों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया, उनके बारे में सवाल पूछे तथा अपने अनुभवों और विचारों को साथियों के साथ साझा किया। इस दौरान विद्यार्थियों में प्रश्न पूछने, निरीक्षण करने, संवाद करने और मिल-जुलकर सीखने की भावना को प्रोत्साहित किया गया। गतिविधि ने बच्चों को यह समझने का अवसर दिया कि उनके आसपास मौजूद प्रत्येक वस्तु और स्थान अपने आप में सीखने का एक माध्यम हो सकता है। इस अवसर पर स्कूल के चेयरमैन इंजीनियर जनेश्वर गर्ग ने कहा कि बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा को सही दिशा देना शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब बच्चे अपने आसपास की दुनिया को स्वयं देखकर, समझकर और प्रश्न पूछकर सीखते हैं तो उनमें सीखने की रुचि और आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें अपने परिवेश को समझने और उसके प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए भी प्रेरित करना है। डायरेक्टर डॉ. मुस्कान गर्ग ने कहा कि अनुभवात्मक गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थी न केवल नई चीजों के बारे में सीखते हैं, बल्कि उनमें सहयोग, साझा करने, देखभाल करने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनने की भावना भी विकसित होती है। उन्होंने कहा कि जिज्ञासा को प्रोत्साहित करके बच्चों में रचनात्मक चिंतन और खोज की प्रवृत्ति को मजबूत किया जा सकता है। प्रधानाचार्या सुश्री नीतू डांडी ने विद्यार्थियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि जब बच्चे अपने परिवेश को केवल देखते नहीं, बल्कि उसे समझने, खोजने और सँजोने का प्रयास करते हैं, तभी वास्तविक अधिगम का जन्म होता है। उन्होंने कहा कि जिज्ञासा से अन्वेषण और अन्वेषण से जिम्मेदारी की भावना विकसित करना विद्यालय की शिक्षण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गतिविधि के दौरान विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और अपने अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा किया। इस पहल से बच्चों की निरीक्षण क्षमता, संवाद-कौशल, रचनात्मक चिंतन, सहयोगात्मक भावना तथा पर्यावरणीय संवेदनशीलता को नई दिशा मिली। गतिविधि ने विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया कि सीखना केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे आसपास की प्रत्येक वस्तु, प्रत्येक स्थान और प्रत्येक अनुभव में ज्ञान का एक नया संसार छिपा है।

