डॉ. सैफुद्दीन किचलू पब्लिक स्कूल में नन्हे बच्चों ने खेल-खेल में सीखा स्वस्थ खानपान का महत्त्व

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आज के आधुनिक दौर में जहां बच्चों में जंक फूड, पैकेटबंद खाद्य पदार्थों और असंतुलित खानपान की आदतें तेजी से बढ़ रही हैं, वहीं बचपन से ही उन्हें पौष्टिक भोजन, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक बनाना समय की महत्त्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मोगा के प्रतिष्ठित डॉ. सैफुद्दीन किचलू पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल के किंडरगार्टन विंग में नर्सरी एवं एल.के.जी. के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों के लिए ‘फूड आइडेंटिफिकेशन’ (खाद्य पदार्थों की पहचान) गतिविधि का आयोजन किया गया। स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन एडवोकेट सुनील गर्ग और डायरेक्टर सुनीता रानी गर्ग के मार्गदर्शन तथा हेड मिस्ट्रेस रूही सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस रोचक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधि का उद्देश्य बच्चों को खेल-खेल में विभिन्न खाद्य पदार्थों की पहचान करवाना, उनके पोषक तत्वों एवं स्वास्थ्य लाभों से परिचित कराना और कम उम्र से ही स्वस्थ खानपान की आदतें विकसित करने के लिए प्रेरित करना था। गतिविधि के दौरान शिक्षिकाओं ने बच्चों को विभिन्न फलों, सब्जियों और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों की पहचान करवाते हुए उनके नाम, रंग, विशेषताओं और पोषण संबंधी महत्त्व के बारे में सरल एवं रोचक ढंग से जानकारी दी। बच्चों को बताया गया कि फल, सब्जियां, अनाज, दालें, दूध और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शरीर के विकास, ऊर्जा, हड्डियों की मजबूती तथा रोगों से लड़ने की क्षमता बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नन्हे विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न खाद्य पदार्थों को पहचानने और उनके नाम सीखने में भाग लिया। बच्चों ने अपने हाथों से फलों एवं सब्जियों का सलाद तैयार करके व्यावहारिक रूप से सीखा कि पौष्टिक भोजन को किस प्रकार अपने दैनिक खानपान का हिस्सा बनाया जा सकता है। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को संतुलित आहार के महत्त्व, भोजन करने के सही तरीकों तथा अच्छी खानपान संबंधी आदतों के बारे में भी जागरूक किया गया। रंग-बिरंगे फलों और सब्जियों के साथ की गई इस गतिविधि ने सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक बना दिया, जिससे बच्चों ने बिना किसी दबाव के नई जानकारियां प्राप्त कीं।

इस अवसर पर स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन एडवोकेट सुनील गर्ग ने कहा कि आज के समय में बच्चों के खानपान में जंक फूड, अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की बढ़ती रुचि अभिभावकों एवं शिक्षकों के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में बच्चों को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं है कि क्या खाना चाहिए, बल्कि उन्हें यह समझाना भी आवश्यक है कि पौष्टिक भोजन उनके शरीर और स्वास्थ्य के लिए क्यों जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बचपन में विकसित की गई अच्छी खानपान की आदतें जीवनभर के स्वास्थ्य की मजबूत नींव बनती हैं। यदि बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही फलों, सब्जियों और संतुलित आहार के महत्त्व की जानकारी दी जाए, तो वे धीरे-धीरे पौष्टिक भोजन चुनने के प्रति जागरूक बन सकते हैं। एडवोकेट सुनील गर्ग ने कहा कि विद्यालय का दायित्व केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें स्वस्थ, अनुशासित, जागरूक और जिम्मेदार जीवन जीने के लिए तैयार करना भी है। इसी सोच के तहत स्कूल में ऐसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाता है, जिनके माध्यम से बच्चे अपने दैनिक जीवन से जुड़ी आवश्यक बातें व्यावहारिक अनुभवों के जरिए सीख सकें। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर ही सक्रिय मस्तिष्क और बेहतर सीखने की क्षमता का आधार है। पौष्टिक भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और अच्छी दिनचर्या बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसलिए विद्यालय और अभिभावकों को मिलकर बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए। स्कूल की डायरेक्टर सुनीता रानी गर्ग ने कहा कि प्रारंभिक बाल्यावस्था बच्चों के सीखने, समझने और आदतें विकसित करने का सबसे महत्त्वपूर्ण समय होता है। इस अवस्था में बच्चों को जो जानकारी और अनुभव मिलते हैं, वे उनके व्यवहार एवं व्यक्तित्व के विकास पर गहरा प्रभाव डालते हैं। उन्होंने कहा कि किंडरगार्टन स्तर पर शिक्षा को रोचक, गतिविधि-आधारित और अनुभवात्मक बनाना आवश्यक है। जब बच्चे किसी विषय को स्वयं देखकर, छूकर, पहचानकर और गतिविधियों में भाग लेकर सीखते हैं, तो उनकी समझ अधिक प्रभावी बनती है और सीखी गई बातें लंबे समय तक याद रहती हैं। सुनीता रानी गर्ग ने कहा कि ‘फूड आइडेंटिफिकेशन’ जैसी गतिविधियां बच्चों में न केवल खाद्य पदार्थों की पहचान करने की क्षमता विकसित करती हैं, बल्कि उनमें स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, जिज्ञासा, आत्मविश्वास और स्वतंत्र रूप से सीखने की प्रवृत्ति भी बढ़ाती हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. सैफुद्दीन किचलू पब्लिक स्कूल में आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के साथ-साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, व्यावहारिक ज्ञान और जीवनोपयोगी कौशलों को विशेष महत्त्व दिया जाता है। स्कूल का प्रयास है कि प्रत्येक बच्चा शिक्षा के प्रारंभिक चरण से ही अच्छी आदतें अपनाए और स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली की ओर अग्रसर हो। स्कूल की हेड मिस्ट्रेस रूही सिंह ने गतिविधि की सराहना करते हुए कहा कि छोटे बच्चों को खेल और मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से सिखाना उनकी सीखने की स्वाभाविक प्रक्रिया को मजबूत बनाता है। इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों को कक्षा की चारदीवारी से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन से जुड़ी महत्त्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त करने का अवसर देती हैं। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पौष्टिक भोजन की पहचान करने के साथ-साथ स्वस्थ रहने का संदेश भी सीखा। विद्यालय का निरंतर प्रयास है कि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही अच्छी आदतों, व्यक्तिगत स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य के प्रति सजग बनाया जाए। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि स्वाद के साथ-साथ भोजन का पौष्टिक होना भी आवश्यक है और संतुलित आहार अपनाकर स्वस्थ जीवन की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। डॉ. सैफुद्दीन किचलू पब्लिक स्कूल में आयोजित यह गतिविधि इस बात का उदाहरण रही कि जब शिक्षा को खेल, अनुभव और दैनिक जीवन की उपयोगी जानकारियों से जोड़ा जाता है, तो सीखना बच्चों के लिए बोझ नहीं, बल्कि आनंददायक अनुभव बन जाता है। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि स्वस्थ आदतों की शुरुआत बचपन से ही होनी चाहिए, क्योंकि आज के जागरूक एवं स्वस्थ बच्चे ही कल के सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बनेंगे।

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