सभी प्रकार की फसलों से पूरी पैदावार पाने में मौसम एक अहम भूमिका निभाता है। हाड़ी की फसल के दौरान, मार्च महीने का तापमान गेहूं, चना और सरसों की फसलों के पकने के समय बहुत असरदार होता है। जिस तरह पिछले कुछ दिनों की बढ़ती गर्मी के कारण किसानों के चेहरे पर निराशा झलकने लगी थी, वहीं अब मौसम में आए बदलाव और ठंड ने किसानों के चेहरों पर फिर से खुशी ला दी है। उक्त विचार खेतीबाड़ी विभाग के पूर्व डायरेक्टर व स्टेट अवार्डी डा. जसविंदर सिंह बराड़ ने मोगा जिले के गांव में गेहूं की फसल का निरीक्षण करने उपरांत किसानों से बातचीत करते हुए प्रकट किए। डा. बराड़ ने कहा कि अगर मार्च के महीने में यह ठंडा मौसम लगातार बना रहता है, तो सभी रबी फसलों से अधिक उत्पादन संभव हो पाएगा। गेहूं की फसल के लिए यह ठंडा मौसम वरदान साबित होगा, क्योंकि इससे न केवल गेहूं की पैदावार अच्छी होगी, बल्कि गेहूं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। मार्च की गर्मी के कारण गेहूं के समय से पहले पकने और दानों के आकार व वजन में कमी आने का डर था, लेकिन मौजूदा ठंड और अनुकूल वातावरण के चलते गेहूं की फसल से भरपूर पैदावार की उम्मीद है। अगर मार्च महीने में यह ठंडा तापमान बना रहता है, तो किसानों को अपनी फसलों से और भी अधिक उत्पादन देखने को मिल सकता है। इसी तरह, मार्च के महीने में सरसों की फसल पर भी ठंडे मौसम का सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। आज की हल्की बारिश और वातावरण में नमी व तापमान में आई गिरावट सभी फसलों के लिए फायदेमंद साबित होगी।

