मोगा में गत रात्रि जो पंजाब सरकार द्वारा कई जिलों में वार्डों की रिजर्वेक्षण का नोटीफिकेशन जारी किया गया है वह फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक या जनगणना पर आधारित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले तथा अपने विरोधियों को चुनावों में रोकने की एक सोची समझी साजिश है। उक्त विचार वार्ड नंबर-38 के पार्षद साहिल अरोड़ा ने प्रकट करते हुए कहा कि हाईकोर्ट में वार्डबंदी पर जो अपना फैसला दिया गया था उसकी रंजिश के तहत सत्ताधारी पार्टी ने विरोधी पार्टी के पार्षदों व लोगों की आवाज को दबाने के लिए गत रात्रि रिजर्वेक्षण का नोटीफिकेशन जारी किया है। उन्होंने कहा कि रिजर्वेक्षण सैंसक्स के अनुसार बनाया जाता है। पर यहां पर अपनी मनमर्जी से ही वार्डों की रिजर्वेक्षण की गई है। जिन वार्डों में जनरल आबादी 70 प्रतिशत से अधिक है उन वार्डों को भी रिजर्व किया गया है तथा कोई मापदंड नियम नहीं अपनाया गया। उन्होंने कहा कि विरोधी पार्षदों व लोगों की आवाज दबाने की यह कोशिश है। उन्होंने कहा कि अब लोगों की कचहरी में ही न्याय के लिए आवाज उठाई जाएगी। उन्होंने कहा कि मैं इस अन्याय के विरुद्ध अपनी आवाज को लोगों के सामने बुलंद करता रहूंगा तथा मुझे उम्मीद है कि लोग भी मेरे अन्याय के विरुद्ध विरोध में मेरा साथ देंगे।

