पुरानी अनाज मंडी के अस्तित्व पर संकट से भड़का गुस्सा, फूंक डाले पुतले 

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सुनाम ऊधम सिंह वाला ( सुशील कुमार)। स्थानीय पुरानी अनाज मंडी के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कारोबारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। शुक्रवार को मंडी के वजूद को बचाने के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर तमाम सियासी दलों के दिग्गज नेता एक मंच पर आए। नेताओं के नेतृत्व में रोष प्रदर्शन करते हुए मंडी चौक पर पुतले फूंके गए और ‘मंडी के गद्दार, मुर्दाबाद’ के जमकर नारे लगाए गए। नेताओं ने कहा कि समाज सेवी घनश्याम कांसल से कोई निजी रंजिश निकालने के प्रयास में दशकों पुरानी मंडी को ख़तरे में डाल दिया गया है । यह सोची-समझी साजिश और ओछी राजनीति है।

– पुरानी अनाज मंडी में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में भाजपा की वरिष्ठ नेत्री दामन बाजवा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजिंदर दीपा व राजिंदर सिंह राजा वीरकलां और शिरोमणि अकाली दल के नेता विन्नरजीत सिंह गोल्डी विशेष रूप से शामिल हुए।नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ स्वार्थी तत्व अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए पूरी पुरानी अनाज मंडी के अस्तित्व को ही दांव पर लगा रहे हैं। एकत्रित हुए आढ़तियों, व्यापारियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने हाथों में पुतले लेकर पूरी मंडी में रोष मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते हुए मंडी चौक पहुंचे, जहां उन्होंने पक्षपातपूर्ण कार्रवाई और मंडी को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के खिलाफ रोष जताते हुए पुतले आग के हवाले कर दिए।नेताओं ने चेतावनी दी कि पुरानी अनाज मंडी से सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। राजनीतिक द्वेष भावना के चलते लिए जा रहे ऐसे फैसलों से स्थानीय व्यापारियों और आढ़तियों में भारी असुरक्षा का माहौल बन गया है।

 

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