खन्ना के नजदीकी गांव मांजारी स्थित बने सुपर मिल्क प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। गांववासियों का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाली तीखी बदबू और प्रदूषण ने उनका जीना दूभर कर दिया है। लोगों का कहना है कि हालात इतने खराब हैं कि घरों में बैठना, खाना खाना और रात को सोना तक मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि प्लांट की चिमनी से निकलने वाले धुएं और बदबू के कारण सांस लेने में दिक्कत होती है। उनका कहना है कि जब घरों में कूलर या एसी चलाया जाता है तो बाहर की बदबू अंदर तक पहुंच जाती है, जिसके चलते उन्हें भीषण गर्मी में भी कूलर और एसी बंद करने पड़ते हैं।
ग्रामीणों इकबाल खान, गांव की पांच के अलावा अन्य लोगों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रदूषण का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। गांव के एक निवासी ने दावा किया कि उसके भाई को लगातार प्रदूषित वातावरण में रहने के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हुई थी, जिससे उसकी मौत हो गई। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लोगों में फैक्ट्री के प्रति भारी रोष है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को लिखित शिकायतें दीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों ने सवाल उठाया कि जब नियमों के अनुसार रिहायशी इलाकों के आसपास प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री लगाने पर प्रतिबंध है, तो फिर इस फैक्ट्री को संचालित करने की अनुमति कैसे दी जा रही है।
कंपनी ने मानी तकनीकी खामी
इस मामले में जब कंपनी सीनियर मैनेजर रजनीश कुमार से बात की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में तकनीकी खराबी आने के कारण समस्या उत्पन्न हुई थी। अधिकारी के अनुसार जब तक प्लांट पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता, तब तक फैक्ट्री का संचालन बंद रखने का फैसला लिया गया है। साथ ही चिमनी से फैलने वाली बदबू को रोकने के लिए लकड़ी के उपयोग को भी बंद करने की बात कही गई है।
मौके पर दिखा गंदे पानी का जमाव
मौके पर निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री के साथ लगती जमीन पर बड़ी मात्रा में काला और बदबूदार पानी जमा मिला। यह गंदा पानी आसपास के क्षेत्र और छोटी नहरों तक पहुंचता दिखाई दिया।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार यदि ऐसा दूषित पानी जमीन में रिसता है तो यह भूजल को प्रभावित कर सकता है, जिससे भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
बड़ा सवाल: क्या खाद्य उत्पाद बनाने वाली फैक्ट्री खुद मानकों पर खरी उतर रही है?
ग्रामीणों का कहना है कि जब फैक्ट्री के आसपास का वातावरण इतना प्रदूषित है और दुर्गंध से भरा हुआ है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि खाद्य उत्पादों के निर्माण में स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों का कितना पालन किया जा रहा होगा।
हालांकि इस संबंध में किसी जांच एजेंसी की रिपोर्ट सामने नहीं आई है, लेकिन लोगों ने खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण विभाग से विस्तृत जांच की मांग की है।
स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन कर प्रशासन से सख्त कार्रवाई करने की मांग भी की
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
गांववासियों ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन से मांग की है कि फैक्ट्री की तुरंत जांच करवाई जाए और यदि पर्यावरण नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि लोगों को प्रदूषण और संभावित बीमारियों से बचाया जा सके।
“दूध बनाने वाली फैक्ट्री से अगर लोगों को सांस लेना मुश्किल हो जाए, तो यह सिर्फ एक शिकायत नहीं बल्कि प्रशासन के लिए चेतावनी है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करते हैं या शिकायतें फाइलों में ही दबी रह जाती हैं।”

