श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को भगवान से जोड़कर जीवन का वास्तविक उद्देश्य बताती है : एडवोकेट सुनील गर्ग

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ब्रह्मलीन स्वामी वेदान्तानंद जी महाराज की पावन तपोस्थली एवं ब्रह्मलीन स्वामी सहज प्रकाश जी महाराज की कर्मस्थली गीता भवन में गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के तत्वावधान में पुरुषोत्तम मास के शुभ अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा स्थल भगवान श्रीहरि के जयघोष, भजन-कीर्तन तथा वैदिक मंत्रोच्चारण से गुंजायमान रहा। वहीं भागवत कथा एवं कथा व्यास का विधि पूर्वक पूजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने कथा व्यास के श्रीमुख से निकले अमृतमय वचनों का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की। कार्यक्रम में गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग, महामंत्री अंशुल श्रीकुंज, जॉइंट सेक्रेटरी सुरेंद्र गोयल, सीनियर उपाध्यक्ष रविंद्र सूद, उपाध्यक्ष भरत अग्रवाल, कैशियर योगेश गर्ग तथा अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, सेवा, संस्कार और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला दिव्य ज्ञान यज्ञ है। उन्होंने कहा कि गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी वर्षों से समाज में सनातन संस्कृति, धार्मिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का कार्य कर रही है। पुरुषोत्तम मास में आयोजित यह कथा प्रत्येक श्रद्धालु के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बन रही है। कथा व्यास आचार्य पंडित सतनारायण जी ने चौथे दिन श्रद्धालुओं को ध्रुव चरित्र का मार्मिक एवं प्रेरणादायक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि बालक ध्रुव को जब राजमहल में अपमान का सामना करना पड़ा, तब उसने निराश होने के बजाय भगवान की शरण ग्रहण की। मात्र पाँच वर्ष की आयु में ध्रुव ने अटूट श्रद्धा, दृढ़ निश्चय और कठोर तपस्या के बल पर भगवान श्रीहरि को प्रसन्न कर लिया। भगवान विष्णु ने प्रकट होकर उसे न केवल अपना आशीर्वाद प्रदान किया बल्कि ध्रुव पद देकर उसे अमर बना दिया। आचार्य जी ने कहा कि ध्रुव चरित्र हमें यह शिक्षा देता है कि जीवन में परिस्थितियाँ कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, यदि मनुष्य के भीतर भगवान के प्रति अटूट विश्वास, धैर्य और समर्पण है तो वह असंभव को भी संभव बना सकता है। भगवान केवल आयु, धन, पद या प्रतिष्ठा नहीं देखते, बल्कि भक्त के हृदय की सच्ची भावना और निष्कपट भक्ति को स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि आज का समाज भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागते हुए मानसिक अशांति, तनाव और असंतोष का शिकार हो रहा है। ऐसे समय में श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को आत्मिक शांति, संतोष और जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करती है। इस दौरान आचार्य पंडित सतनारायण जी ने कहा कि पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण विशेष फलदायी माना गया है। इस पवित्र मास में कथा सुनने, भगवान विष्णु का स्मरण करने तथा सत्संग में भाग लेने से अनेक जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्राप्त होता है। जिस स्थान पर भागवत कथा होती है, वह स्थान तीर्थ के समान पवित्र बन जाता है और वहां उपस्थित श्रद्धालुओं के साथ-साथ उनके पितरों का भी कल्याण होता है। कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीहरि के भजनों पर भाव-विभोर होकर झूम उठे। पूरा वातावरण भक्तिरस से सराबोर दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने कथा के उपरांत गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी द्वारा किए जा रहे धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए इसे सनातन संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बताया। अंत में गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग एवं अन्य पदाधिकारियों ने समस्त श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने परिवार सहित कथा में नियमित रूप से उपस्थित होकर इस दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर का लाभ उठाएं तथा नई पीढ़ी को भी भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ने में सहयोग करें।

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