गीता भवन में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा के दूसरे दिन उमड़ा आस्था का जनसागर

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ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव पूज्यपाद स्वामी वेदांतानंद जी महाराज एवं ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी सहज प्रकाश जी महाराज की पावन तपोभूमि गीता भवन, मोगा में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पावन अवसर पर गीता भवन ट्रस्ट सोसाइटी द्वारा, ट्रस्ट के संरक्षक पूज्य स्वामी चिन्मयानंद जी महाराज के पावन सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा और संपूर्ण वातावरण “राधे-राधे”, “जय श्रीकृष्ण” तथा भजनों की मधुर स्वर-लहरियों से भक्तिमय हो उठा। इस कार्यक्रम का शुभारंभ गीता भवन ट्रस्ट सोसाइटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग, महासचिव अंशुल श्रीकुंज, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रविंदर सूद, कनिष्ठ उपाध्यक्ष भरत कुमार अग्रवाल, सहसचिव सुरिंदर गोयल, कोषाध्यक्ष योगेश गर्ग, ट्रस्टी एडवोकेट मनविंदर सग्गू, ट्रस्टी एडवोकेट कृष्ण मुरारी गुप्ता तथा अन्य यजमानों द्वारा श्रीमद्भागवत पूजन, कलश स्थापना एवं श्रीगणेश वंदना के साथ विधिवत संपन्न हुआ। अपने ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों में कथावाचक पूज्य स्वामी विज्ञनानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य स्वरूप है। इसका श्रद्धापूर्वक श्रवण मनुष्य के अंतःकरण को निर्मल बनाता है, जीवन में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संचार करता है तथा उसे परमात्मा की शरण में ले जाकर आत्मिक शांति एवं मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि गुरु ही वह दिव्य चेतना हैं जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर मनुष्य के जीवन में धर्म, सत्य, करुणा और ईश्वर-भक्ति का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु के श्रीचरणों में समर्पित जीवन ही वास्तविक सफलता और आत्मकल्याण का आधार है। इस अवसर पर गीता भवन ट्रस्ट सोसाइटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर के समकक्ष माना गया है, क्योंकि गुरु ही मनुष्य को आत्मज्ञान, संस्कार और जीवन का सही उद्देश्य प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त करने का दिव्य अवसर है। गुरु की कृपा से ही जीवन में विवेक, संयम, सेवा और सदाचार के संस्कार विकसित होते हैं, जो समाज और राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला हैं। इस मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग ने कहा कि गीता भवन ट्रस्ट सोसाइटी पिछले कई दशकों से मोगा एवं आसपास के क्षेत्र में धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना के प्रसार का एक प्रमुख केंद्र बनी हुई है। यहां आयोजित होने वाले कथा, सत्संग, यज्ञ, संस्कार एवं सेवा कार्य हजारों श्रद्धालुओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बन रहे हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने परिवार सहित कथा श्रवण कर संत-महापुरुषों का आशीर्वाद प्राप्त करें तथा सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में अपना योगदान दें। उन्होंने बताया कि 22 जुलाई से 28 जुलाई तक प्रतिदिन सायं 3:30 बजे से 6:30 बजे तक श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा का आयोजन किया जा रहा है। 29 जुलाई को प्रातः 11:00 बजे व्यास पूजन, गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें दूर-दराज़ से आने वाले संत-महात्माओं एवं हजारों श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है। अंत में श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान कर भजनों पर भाव-विभोर होकर प्रभु का गुणगान किया तथा संपूर्ण गीता भवन परिसर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा।

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