रक्त की एक-एक बूंद किसी के लिए जिंदगी और मौत के बीच का फर्क बन सकती है। इसी सोच को दिल में लेकर कच्चा मलक रोड स्थित काका जी स्टूडियो की अगुवाई में चार दोस्तों—दिनेश कुमार, राजन खुराना, पंकज अरोड़ा और सुनील मक्कड़—ने मिलकर रक्तदान कैंप का आयोजन किया। चारों दोस्त भाइयों की तरह रहते हैं, इसी भाईचारे के प्रतीक के तौर पर उन्होंने अपनी संस्था का नाम ‘4 ब्रदर’ रखा है। इस कैंप में 183 से अधिक लोगों ने रक्तदान कर इंसानियत की मिसाल कायम की।
युवतियों और महिलाओं ने भी बढ़ाया हौसला
कैंप की सबसे खास बात यह रही कि युवा लड़कियों और महिलाओं ने भी पूरे उत्साह के साथ रक्तदान किया। बिना किसी झिझक के आगे आईं इन महिलाओं ने साबित कर दिया कि समाजसेवा और मानवता के कार्यों में महिलाएं किसी से पीछे नहीं हैं। उन्होंने न केवल स्वयं रक्तदान किया, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी इस नेक काम के लिए प्रेरित किया।
18 साल पूरे होते ही पहली बार किया रक्तदान
कैंप का सबसे भावुक पल उस समय सामने आया, जब 18 वर्ष की उम्र पूरी करते ही एक युवक ने अपना पहला रक्तदान किया। उम्र की दहलीज पर कदम रखते ही किसी अनजान जिंदगी को बचाने के लिए अपना खून देना उसके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक क्षण रहा।
वहीं रक्तदान को अपनी जिंदगी की मुहिम बना चुके नरेश कुमार करनाल ने 104 बार रक्तदान करने के बाद 105वीं बार रक्तदान किया। नरेश कुमार संस्था के सदस्य पंकज अरोड़ा के मामा हैं। उनका लगातार रक्तदान करना युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
‘एक यूनिट खून… किसी की पूरी जिंदगी’
आयोजकों ने कहा कि रक्त किसी फैक्ट्री में तैयार नहीं होता। जब किसी मरीज को खून की जरूरत पड़ती है तो किसी दूसरे इंसान द्वारा दिया गया रक्त ही उसके लिए जिंदगी की उम्मीद बनता है।
उन्होंने कहा कि एक यूनिट रक्त किसी मां की गोद सूनी होने से बचा सकता है, किसी बहन का भाई बचा सकता है और किसी बच्चे के सिर से पिता का साया छिनने से रोक सकता है। इसलिए हर स्वस्थ और योग्य व्यक्ति को नियमित रूप से रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
आज आपका रक्त, किसी अनजान की जिंदगी की आखिरी उम्मीद
कैंप में रक्तदान करने पहुंचे लोगों ने समाज से अपील की कि रक्तदान को लेकर डर और झिझक को पीछे छोड़कर आगे आएं। आज शरीर से निकली रक्त की कुछ बूंदें किसी ऐसे अनजान व्यक्ति तक पहुंच सकती हैं, जिसे शायद जिंदगी और मौत के बीच सिर्फ उसी रक्त की जरूरत हो।

