पटियाला ग्रामीण में विकास कार्यों को नई गति देते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में गांव घमरौदा और मंडौड़ में सैनिटेशन और छप्पड़ों के नवीनीकरण कार्यों का नींव पत्थर रखा। इस अवसर पर उनके साथ अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ग्रामीण विकास) श्री दमनजीत सिंह मान और एस.डी.एम. नाभा श्री रविंदरपाल सिंह सोमल भी मौजूद थे।
इसके अलावा डॉ. बलबीर सिंह ने गांव हियाणा कलां में 24 घंटे बिजली आपूर्ति की शुरुआत भी करवाई। उन्होंने बताया कि मंडौड़ में लगभग 2.5 करोड़ रुपये और घमरौदा में 1 करोड़ रुपये की लागत से सैनिटेशन और छप्पड़ों के नवीनीकरण के कार्य शुरू किए गए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गांवों में गंदे पानी की समस्या को हल करने के साथ-साथ पानी को साफ करके इसका उचित पुन: उपयोग और गांवों के पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। घमरौदा और मंडौड़ गांवों में चल रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि दोनों गांवों में गंदे पानी की समस्या लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी। इसके समाधान के लिए आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्रणाली विकसित की जा रही है, जिसके तहत गंदे पानी को विभिन्न चरणों से गुजारकर साफ किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि घमरौदा गांव में सीवरेज के गंदे पानी की निकासी के कारण लगभग साढ़े चार एकड़ क्षेत्र में गंदगी और बदबू की समस्या पैदा हो रही थी। अब यहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से सीवरेज के पानी को ट्रीट करने के लिए चैंबर बनाए जा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए आई.आई.टी. रोपड़ की तकनीकी सहायता भी ली जा रही है।
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि ट्रीटमेंट के बाद पानी का पुन: उपयोग किया जा सकेगा और इसमें मछली पालन जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। मछली पालन से होने वाली आय पंचायत के खाते में जाएगी, जिससे प्रोजेक्ट की देख-रेख और रख-रखाव के लिए आवश्यक मानव संसाधनों का प्रबंध किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इन प्रोजेक्टों को केवल गंदे पानी के निपटारे तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि इन्हें मॉडल पर्यावरण पार्कों के रूप में विकसित करने की योजना है। इन स्थानों पर नानक बगीची, पौधे लगाना, विरासती पेड़ों की संभाल और बटरफ्लाई पार्क जैसी गतिविधियां विकसित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर पुराने और विरासती किस्मों के पेड़ लगाने को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि गांवों की प्राकृतिक विरासत को संरक्षित किया जा सके। इसके साथ ही मनरेगा और अन्य उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से पौधे लगाने और पार्कों की संभाल के लिए गांव के लोगों को जोड़ा जाएगा, जिससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी और गांववासी मौजूद थे।

