नशे की लत जिंदगी को मुश्किलों की ओर धकेल सकती है, लेकिन सही उपचार, दृढ़ इच्छाशक्ति और सहयोग से जिंदगी को दोबारा सही राह पर लाया जा सकता है। इसकी प्रेरणादायक मिसाल मोगा के वरुण कुमार (काल्पनिक नाम) हैं, जिन्होंने पंजाब सरकार की ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ मुहिम के तहत नशा मुक्ति केंद्र जनेर से उपचार करवाकर नशे को मात दी है। आज वह नशे से दूर रहकर स्वस्थ और आत्मनिर्भर जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
वरुण कुमार (काल्पनिक नाम) का यह सफर उन युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो किसी कारणवश नशे की लत का शिकार हो गए हैं और इससे बाहर निकलने का प्रयास कर रहे हैं। उनके जीवन में आया यह सकारात्मक बदलाव दर्शाता है कि नशा छोड़ने के लिए पहला कदम उपचार करवाने का निर्णय लेना है। नशे की लत को छिपाने या इसके कारण निराश होने के बजाय समय पर उपचार और सहयोग प्राप्त करना आवश्यक है।
अपने जीवन में आए इस सकारात्मक बदलाव के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने नशे की लत से जूझ रहे युवाओं को संदेश दिया कि वे हिम्मत न हारें और नशा छोड़ने के लिए उपचार का रास्ता अपनाएं। उनके अनुसार, सही उपचार और मजबूत इच्छाशक्ति से नशे से छुटकारा पाकर जिंदगी को नई दिशा दी जा सकती है।
उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा नशे से पीड़ित लोगों के उपचार के लिए जनेर स्थित पुनर्वास केंद्र में उन्हें हर प्रकार की सहायता प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि नशा छोड़ने के बाद भी जनेर पुनर्वास केंद्र के मनोवैज्ञानिक लगातार उनके संपर्क में रहते हैं और उनका मार्गदर्शन करते हैं।
उन्होंने बताया कि अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपना डॉग ब्रीडिंग (कुत्तों के प्रजनन एवं पालन) का काम कर रहे हैं, जिससे वह अपना और अपने परिवार का जीवनयापन कर रहे हैं।
डिप्टी कमिश्नर मोगा श्री सागर सेतिया ने कहा कि वरुण कुमार की कहानी का संदेश स्पष्ट है—नशा जिंदगी का अंत नहीं है, बल्कि सही समय पर लिया गया निर्णय एक नई शुरुआत बन सकता है। नशे से दूर रहकर स्वस्थ, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जीना संभव है। ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ जैसे प्रयासों का उद्देश्य भी नशे की लत से पीड़ित लोगों को उपचार से जोड़कर उन्हें दोबारा समाज की मुख्यधारा में लाना है।

