तपाचार्या संथारा साधिका गुरनी मैया श्री हेम कुंवर जी महाराज साहिब की परम सुशिष्या दिव्य साधिका उपप्रवर्तिनी महासाध्वी श्री रजत रश्मि जी महाराज, महासाध्वी श्री समृद्धि जी महाराज साहिब, महासाध्वी श्री वृद्धि जी महाराज साहिब महासाध्वी श्री सयंता जी महाराज साहिब ठाने 4 जैन स्थानक के विशाल प्रांगण में चातुर्मास हेतु विराजमान हैं। चातुर्मास में महाराज श्री जी प्रतिदिन 8-00 से 9-00 बजे तक जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर भगवान महावीर की अनमोल जिनवाणी से सभी धर्म प्रेमी बन्धुओं को चरित्र निर्माण के टिप्स दे कर जागरूक करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। महाराज श्री जी प्रभु महावीर की अमृत मयी वाणी से लोगों को भक्ति का मार्ग और आज के इस व्यस्त जीवन में आदर्श जीवन जीने की कला के बारे में विशेष रूप से चर्चा कर रहे हैं। क्यों कि आज के युग में आदर्श जीवन जीने की कला के विषय को लेकर सभी गंभीर है। महाराज श्री जी ने अपने प्रवचन के माध्यम से फ़रमाया कि जीवन जीने की कला को केवल तप भक्ति,सत्संग और महापुरुषों की संगत करने से ही जाना जा सकता है। क्यों कि आज के समय में हम इतने व्यस्त हैं कि हमारे पास इन मुद्दों पर विचार करने का समय ही नहीं अगर हम जब किसी सत्संग में बैठ कर ध्यान लगाने का प्रयास करते हैं परन्तु हमारा यह चंचल मन इधर उधर भटकता रहता है। भक्ति तो दूर की बात है । महाराज श्री जी ने एक दृष्टांत के माध्यम से भक्ति का उल्लेख करते हुए फ़रमाया कि चन्दन बाला ने प्रभु महावीर की भक्ति कर अपने आप को , प्रभु राम की अनन्य भक्ति स्वरुप भीलनी के बेर, और प्रभु राम जी को गंगा पार कराने वाले खेवट ने प्रभु चरण धो कर अपने आपको जन्म मरण के बन्धनों से मुक्त हुए, इसके साथ साथ मीरां बाई ने भी भगवान श्री कृष्ण की भक्ति सत्संग ,करके अपने जीवन का उद्धार किया। इसलिए अगर हमें अपने जीवन का उद्धार करना है तो सन्तों, महापुरुषों की शरण में जा कर सत्संग और भक्ति के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। भक्ति और सत्संग में लीन हो कर ही हम आदर्श जीवन जीने की कला सीख सकेंगे और अपने जीवन का उद्धार कर पायेंगे। जैन श्रमण संघ के द्वितीय पटधर आचार्य सम्राट श्री आनन्द ऋषि जी महाराज साहिब की जन्म जयंती दिव्य साधिका उपप्रवर्तिनी महासाध्वी श्री रजत रश्मि जी महाराज साहिब के पावन सानिध्य में दिनांक 16-08-2026 दिन रविवार को प्रातः 8-00 से 9-15 बजे तक बड़े हर्षोल्लास के साथ जैन स्थानक के विशाल प्रांगण में आयोजित की जा रही है आप सभी महाराज श्री जी के मुखारविंद से आचार्य भगवन् के जीवन परिचय और आदर्श जीवनशैली तप त्याग संबंधी विचार श्रवण कर अपने जीवन को सार्थक करने का प्रयास करें। इस अवसर पर नन्हे मुन्ने बच्चों,बहनों और स्मारक समिति द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जायेगा। आप सभी इस समारोह में सम्मिलित होकर महापुरुषों के वाणी श्रवण कर अपने जीवन को सफल करने का हर संभव प्रयास करें। इस कार्यक्रम की जानकारी प्रवक्ता प्रियव्रत गुप्ता ‘जैन ‘ ने दी।

