बुधवार रात करीब 8 बजे मोगा के गांव जनेर स्थित सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में मरीजों ने स्टाफ और सिक्योरिटी गार्ड के साथ मारपीट की और मेन गेट का ताला तोड़कर 31 मरीज फरार हो गए। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह मरीजों ने ताला तोड़कर भागे सारे युवक। 3 पुलिस कर्मी 4 प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड के इलावा 15 और अन्य स्टाफ हे फिर इस तरहां घटना सामने आया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी है। भागे हुए मरीजों को पकड़े ने लिए अलग अलग टिम छापा मारी कर रहे।
मिली जानकारी के अनुसार मोगा के गांव जनेर स्थित सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में कुल 98 मरीज दाखिल थे। इनमें कुछ युवकों को उनके परिवार वालों ने नशा छुड़ाने के लिए भर्ती करवाया था, जबकि कुछ को NDPS मामलों के तहत पुलिस द्वारा यहां दाखिल कराया गया था। इनमें से 2/3 युवकों पर आपराधिक मामले भी दर्ज बताए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि नशा मुक्ति केंद्र में मौजूद कुछ आपराधिक गतिविधियों के साथ जुड़े हुए युवकों ने पहले अन्य मरीजों को भड़काया। बुधवार रात जब स्टाफ अंदर खाना देने गया, तो अचानक सभी ने मिलकर स्टाफ और सिक्योरिटी गार्ड पर हमला कर दिया और मुख्य गेट का ताला तोड़कर फरार हो गए। घटना के दौरान स्टाफ ने करीब 6-7 युवकों को मौके पर ही काबू कर लिया, जबकि 31 मरीज फरार होने में सफल रहे। सूत्रों के अनुसार, इस नशा मुक्ति केंद्र में 25 बेड की आधिकारिक क्षमता है, लेकिन अतिरिक्त बेड लगाकर कुल 98 मरीजों को रखा गया था। स्टाफ में कुल 19 सदस्य हैं, जिनमें एक मेडिकल अफसर, दो काउंसलर, दो सफाई कर्मचारी, चार सिक्योरिटी गार्ड, स्टाफ नर्स (मेल) और वार्ड बॉय शामिल हैं। इसके अलावा, यहां 24 घंटे ड्यूटी पर तीन पुलिस कर्मी भी तैनात रहते हैं। केंद्र में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए हैं, इसके बावजूद मरीजों द्वारा इतनी बड़ी साजिश रच ली गई और स्टाफ को इसकी भनक तक नहीं लगी। इस पूरे मामले में नशा मुक्ति केंद्र के इंचार्ज ने मीडिया के सामने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उच्च अधिकारी ही जानकारी देंगे।
मौके पर पहुंचे थाना कोट ई सेखा के थाना प्रभारी सुनीता रानी ने बताया कि बुधवार रात करीब 8 बजे सूचना मिली थी कि नशा मुक्ति केंद्र से कुछ मरीज फरार हो गए हैं। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जिसमें पाया गया कि कुल 98 मरीजों में से 31 मरीज भागने में सफल रहे। उनके नाम और पते रजिस्टर में दर्ज हैं परिवार को बुलाया गया और उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस टीम लगातार छापेमारी कर रही है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 2/3 ऐसे मरीज, जिन पर पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं, उन्होंने अन्य मरीजों को भड़काया और इस घटना को अंजाम दिया। थाना प्रभारी ने बताया कि केंद्र में सुरक्षा के लिए तीन पुलिसकर्मी 24 घंटे तैनात रहते हैं। साथ ही इनके 4 प्राइवेट सिक्योरिटी भी हे। फिलहाल केंद्र में मौजूद अन्य मरीजों से पूछताछ की जा रही है।

