पुरुषोत्तम मास में गीता भवन में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ, वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा परिसर

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ब्रह्मलीन स्वामी वेदान्तानंद जी महाराज की तपोस्थली एवं ब्रह्मलीन स्वामी सहज प्रकाश जी महाराज की कर्मस्थली एवं गीता भवन, मोगा में गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के तत्वावधान में पावन पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। कथा के प्रथम दिवस पर गीता भवन का वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और भगवान के जयघोष से भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ नवग्रह पूजन, कलश स्थापना एवं भगवान शालिग्राम के दिव्य अभिषेक घी, दूध, दही, शक्कर, जल, गंगाजल, पंचामृत से हुआ। इस अवसर पर विद्वान आचार्य पंडित सतनारायण जी एवं पंडित राम जी द्वारा वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ समस्त धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाए गए। भगवान शालिग्राम का अभिषेक दूध, दही, जल, पंचामृत एवं पवित्र सामग्री से किया गया तथा श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। इसके उपरांत विधिवत श्रीमद्भागवत महापुराण का पूजन कर उसे यज्ञ मंडप में स्थापित किया गया तथा कलश पूजन एवं जौं (जवारे) बोने की पावन परंपरा का भी निर्वहन किया गया। इसके साथ ही श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया गया कि सनातन परंपरा में कलश स्थापना को सृष्टि, समृद्धि और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। कलश में सभी देवताओं का वास माना जाता है तथा इसकी स्थापना से धार्मिक अनुष्ठानों में शुभता और पवित्रता का संचार होता है। इसी प्रकार जौं बोने की परंपरा जीवन में उन्नति, समृद्धि, हरियाली, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक विकास का प्रतीक मानी जाती है। जैसे-जैसे जौं अंकुरित होकर बढ़ते हैं, वैसे-वैसे साधक के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं धार्मिक चेतना के विकास की कामना की जाती है। वैदिक परंपरा में जौं को पवित्रता, उर्वरता और मंगल कार्यों का प्रतीक माना गया है। भगवान शालिग्राम को स्वयं भगवान विष्णु का साक्षात स्वरूप माना गया है। पुरुषोत्तम मास में शालिग्राम भगवान का अभिषेक विशेष पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि शालिग्राम पूजन एवं अभिषेक से परिवार में सुख-शांति, धन-धान्य की वृद्धि, कष्टों का निवारण तथा भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के पदाधिकारियों ने बताया कि लगभग 32 महीने, 16 दिन और 8 घंटे के अंतराल के बाद आने वाला पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु एवं भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। शास्त्रों में वर्णित है कि जब अन्य महीनों ने इस अतिरिक्त मास की उपेक्षा की, तब भगवान श्रीकृष्ण ने इसे अपना नाम देकर “पुरुषोत्तम मास” का गौरव प्रदान किया। इसी कारण इस मास में जप, तप, दान, सत्संग, कथा श्रवण और धार्मिक अनुष्ठानों का फल अनेक गुना बढ़ जाता है। इस मौके पर गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग, महामंत्री अंशुल श्रीकुंज, जॉइंट सेक्रेटरी सुरेंद्र गोयल तथा सीनियर उपाध्यक्ष रविंद्र सूद, उपाध्यक्ष भरत अग्रवाल, कैशियर योगेश गर्ग ने समस्त श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे 15 जून तक प्रतिदिन सायं 4 बजे से 7 बजे तक आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथा में परिवार सहित पहुंचकर धर्म लाभ प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि गीता भवन सदैव से सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक जागरण और सामाजिक सद्भाव का केंद्र रहा है तथा भविष्य में भी धर्म और संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे आयोजन निरंतर करता रहेगा। कथा के प्रथम दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया तथा पुरुषोत्तम मास के शुभारंभ पर भगवान से विश्व कल्याण, परिवारों की सुख-समृद्धि और समाज में धर्म की स्थापना की प्रार्थना की।

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