ब्रह्मलीन स्वामी वेदान्तानंद जी महाराज की पावन तपोस्थली तथा ब्रह्मलीन स्वामी सहज प्रकाश जी महाराज की कर्मस्थली गीता भवन, मोगा में गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने यह प्रमाणित कर दिया कि आज भी समाज में सनातन धर्म, सत्संग और भागवत कथा के प्रति अटूट आस्था विद्यमान है। पूरे परिसर में ह्लहरे कृष्णह्व, ह्लराधे-राधेह्व और ह्लजय श्रीहरिह्व के जयघोषों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग, महामंत्री अंशुल श्रीकुंज, जॉइंट सेक्रेटरी सुरेंद्र गोयल, सीनियर उपाध्यक्ष रविंद्र सूद, उपाध्यक्ष भरत अग्रवाल तथा कैशियर योगेश गर्ग द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। इस अवसर पर विद्वान आचार्य पंडित सतनारायण जी एवं पंडित राम जी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य पूजा-अर्चना संपन्न करवाई। इस अवसर पर गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि पुरुषोत्तम मास केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक उत्थान, आत्मशुद्धि और भगवान से जुड़ने का दुर्लभ अवसर है। उन्होंने कहा कि लगभग 32 महीने, 16 दिन और 8 घंटे के पश्चात आने वाला यह पावन मास स्वयं भगवान विष्णु एवं भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार जब इस अतिरिक्त मास को अन्य महीनों ने स्वीकार नहीं किया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने इसे अपना नाम देकर ह्लपुरुषोत्तम मासह्व का गौरव प्रदान किया। इसलिए यह मास समस्त महीनों में श्रेष्ठ और परम पुण्यदायी माना गया है। एडवोकेट सुनील गर्ग ने कहा कि गीता भवन केवल एक भवन नहीं, बल्कि संत परंपरा, धर्म, सेवा और संस्कारों का एक जीवंत तीर्थ है। स्वामी सहज प्रकाश जी महाराज और स्वामी वेदान्तानंद जी महाराज द्वारा स्थापित आध्यात्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाना गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकतावादी युग में जब मनुष्य तनाव, चिंता और अशांति से घिरा हुआ है, तब श्रीमद्भागवत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजन मानव जीवन को नई दिशा और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं। कथा व्यास आचार्य पंडित सतनारायण जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात स्वरूप है। भागवत कथा मनुष्य को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के मार्ग पर अग्रसर करती है तथा उसे सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर ईश्वर से जोड़ती है। उन्होंने श्रीमद्भागवत का प्रसिद्ध श्लोक उद्धृत करते हुए कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा और प्रेम से भगवान की कथाओं का श्रवण करता है, भगवान स्वयं उसके हृदय में स्थित होकर उसके समस्त पापों, दोषों और दु:खों का नाश कर देते हैं। आचार्य जी ने कहा कि पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण विशेष फलदायी माना गया है। इस दौरान भगवान नारायण की कृपा सहज ही प्राप्त होती है। कथा श्रवण से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं, मानसिक शांति प्राप्त होती है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है तथा पितरों को भी तृप्ति और शांति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव जीवन में सदाचार, सेवा, करुणा, विनम्रता और ईश्वर भक्ति का संचार करना है। उन्होंने आगे कहा कि श्रीमद्भागवत में वर्णित भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं हमें यह संदेश देती हैं कि धर्म की रक्षा, सत्य का पालन और मानवता की सेवा ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है। कथा का प्रत्येक प्रसंग जीवन को प्रेरणा देता है और मनुष्य को आत्मकल्याण की ओर अग्रसर करता है। इस अवसर पर गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के पदाधिकारियों ने कहा कि गीता भवन सदैव से धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। संस्था समय-समय पर कथा, सत्संग, यज्ञ, संस्कार शिविर एवं अन्य धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज को अपनी सनातन संस्कृति से जोड़ने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता, सेवा और सदाचार का जीवन जीना ही सच्चा धर्म है। कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक भव्य एवं दिव्य बना दिया। महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने पूरे श्रद्धाभाव से कथा श्रवण किया तथा भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में विश्व शांति, परिवारों की सुख-समृद्धि, राष्ट्र की उन्नति और सनातन धर्म के उत्थान की प्रार्थना की। अंत में गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग, महामंत्री अंशुल श्रीकुंज, जॉइंट सेक्रेटरी सुरेंद्र गोयल, सीनियर उपाध्यक्ष रविंद्र सूद, उपाध्यक्ष भरत अग्रवाल एवं कैशियर योगेश गर्ग ने समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे 15 जून तक प्रतिदिन सायं 4 बजे से 7 बजे तक आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथा में अपने परिवार सहित उपस्थित होकर इस दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर का लाभ उठाएं और अपने जीवन को भगवान की भक्ति एवं सत्संग के प्रकाश से आलोकित करें।

