गीता भवन केवल एक भवन नहीं, बल्कि धर्म, संस्कार और सनातन संस्कृति का जीवंत केंद्र है : एडवोकेट सुनील गर्ग

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ब्रह्मलीन स्वामी वेदान्तानंद जी महाराज की पावन तपोस्थली एवं ब्रह्मलीन स्वामी सहज प्रकाश जी महाराज की कर्मभूमि श्री गीता भवन, मोगा में गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के तत्वावधान में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर कथा अमृत का रसपान किया तथा भगवान श्रीहरि के भजनों और संकीर्तन में भाग लेकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग, महामंत्री अंशुल श्रीकुंज, जॉइंट सेक्रेटरी सुरेंद्र गोयल, सीनियर उपाध्यक्ष रविंद्र सूद, उपाध्यक्ष भरत अग्रवाल तथा कैशियर योगेश गर्ग द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर आचार्य पंडित सतनारायण जी एवं पंडित राम जी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न करवाई। इस अवसर पर गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि पुरुषोत्तम मास भगवान श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर है। यह मास हमें अपने जीवन को धर्म, भक्ति, सेवा और सत्संग से जोड़ने का संदेश देता है। गीता भवन केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक सेवा का एक सशक्त केंद्र है, जो वर्षों से समाज में धार्मिक जागृति और नैतिक संस्कारों का प्रकाश फैला रहा है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में मनुष्य मानसिक तनाव, अशांति और अनेक प्रकार की चुनौतियों से घिरा हुआ है। ऐसे समय में श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन को नई दिशा देने का कार्य करती है। कथा हमें भगवान के प्रति समर्पण, माता-पिता के प्रति सम्मान, समाज के प्रति सेवा तथा राष्ट्र के प्रति कर्तव्य का बोध कराती है। उन्होंने कहा कि गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी सदैव समाज को धर्म, शिक्षा, सेवा और संस्कारों से जोड़ने के लिए समर्पित रही है और भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज का मार्गदर्शन करती रहेगी। कथा व्यास आचार्य पंडित सतनारायण जी ने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला दिव्य सेतु है। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होता है, वह स्थान स्वयं गंगाजी के समान पवित्र और पुण्यदायी बन जाता है। वहां का वातावरण देवमय हो जाता है तथा भगवान की विशेष कृपा उस स्थान पर बनी रहती है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का श्रवण करने वाले श्रद्धालुओं का ही नहीं, बल्कि उनके पितरों का भी कल्याण होता है और उनके लिए बैकुंठ के द्वार प्रशस्त होते हैं। श्रीमद्भागवत महापुराण कलियुग के समस्त दोषों, पापों और नकारात्मक प्रभावों को समाप्त करने का सबसे सरल और प्रभावी साधन है। कथा श्रवण से मनुष्य के भीतर से अहंकार, लोभ, मोह, क्रोध और ईर्ष्या जैसे विकार दूर होते हैं तथा जीवन में शांति, संतोष और आध्यात्मिक आनंद का संचार होता है। आचार्य जी ने कहा कि पुरुषोत्तम मास में कथा श्रवण, जप, तप, दान और भगवान विष्णु की आराधना का फल अनेक गुना बढ़ जाता है। इस पावन मास में श्रीमद्भागवत कथा सुनने वाला भक्त भगवान की विशेष कृपा का पात्र बनता है और उसके जीवन में सुख, समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं एवं दिव्य प्रसंगों का रसपान कर भाव-विभोर हो उठे। संपूर्ण कथा पंडाल राधे-राधे, जय श्रीकृष्ण, हरि बोल तथा गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो के जयघोषों से गुंजायमान रहा। भक्ति और श्रद्धा की इस अविरल धारा में उपस्थित श्रद्धालु स्वयं को धन्य महसूस करते दिखाई दिए। गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के पदाधिकारियों ने बताया कि गीता भवन समय-समय पर धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का आयोजन कर समाज को एक सकारात्मक दिशा प्रदान करता रहा है। संस्था का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सनातन परंपराओं से जोड़ना भी है। अंत में गीता भवन ट्रस्ट सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील गर्ग, महामंत्री अंशुल श्रीकुंज, जॉइंट सेक्रेटरी सुरेंद्र गोयल, सीनियर उपाध्यक्ष रविंद्र सूद, उपाध्यक्ष भरत अग्रवाल एवं कैशियर योगेश गर्ग ने समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे पुरुषोत्तम मास के इस दिव्य अवसर पर प्रतिदिन सायं 4 बजे से 7 बजे तक आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथा में अपने परिवार सहित उपस्थित होकर भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त करें तथा अपने जीवन को धर्म, भक्ति और सत्संग के प्रकाश से आलोकित करें।

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