पंजाब में एक ओर जहां रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में युवा विदेशों का रुख कर रहे हैं, वहीं मोगा की 22 वर्षीय गुरलीन कौर ने यूके का वीजा मिलने के बावजूद पंजाब सरकार में स्टाफ नर्स की नौकरी को प्राथमिकता देकर एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। गुरलीन कौर ने बेहद कम उम्र में अपनी मेहनत और लगन के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उनके परिवार का स्वास्थ्य सेवाओं से गहरा नाता रहा है। गुरलीन की माता राजिंदर कौर मोगा के सिविल अस्पताल में स्टाफ नर्स हैं। गुरलीन के मासी भी सरकारी अस्पताल में स्टाफ नर्स के रूप में सेवाएं दे रही हैं, जबकि उनकी नानी ने भी मोगा सरकारी अस्पताल में एलएचवी (LHV) के पद पर अपनी सेवाएं निभाई थीं। गुरलीन का जन्म भी मोगा सिविल अस्पताल में हुआ था और उनका बचपन सरकारी अस्पताल के क्वार्टरों में बीता। बचपन से ही उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को मरीजों की सेवा करते देखा, जिससे उनके मन में भी नर्स बनकर समाज सेवा करने का सपना पैदा हुआ। आखिरकार 22 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना यह सपना साकार कर लिया।
12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद गुरलीन ने बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई की। उन्होंने थापर कॉलेज से नर्सिंग की शिक्षा प्राप्त की और बाबा फरीद यूनिवर्सिटी से बीएससी नर्सिंग की डिग्री हासिल की। गुरलीन ने बेहतर भविष्य की उम्मीद में यूके जाने के लिए आवेदन किया था। किस्मत का ऐसा संयोग रहा कि जिस दिन उन्हें यूके का वीजा मिला, उसी दिन पंजाब सरकार की स्टाफ नर्स भर्ती में उनके चयन की खबर भी आ गई। काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने विदेश जाने के बजाय सरकारी नौकरी को चुना। आज गुरलीन कौर को मोगा सरकारी अस्पताल में स्टाफ नर्स के पद का जॉइनिंग लेटर प्राप्त हुआ, जिससे पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। उनकी सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी है।
गुरलीन कौर ने बताया कि बचपन से ही उनका सपना अपनी माता और नानी की तरह मोगा सिविल अस्पताल में सेवा करने का था। उन्होंने कहा कि बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के मात्र पांच महीने बाद ही उन्हें पंजाब सरकार की ओर से स्टाफ नर्स की नौकरी मिल गई, जिससे उनका सपना साकार हो गया। गुरलीन ने बताया कि उनका जन्म भी मोगा सिविल अस्पताल में हुआ था और वे इसी माहौल में बड़ी हुई हैं। इसलिए यह अस्पताल उनके लिए किसी परिवार से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि एक समय उन्होंने विदेश जाने का मन बना लिया था, लेकिन भारत में ही सरकारी नौकरी मिलने के बाद उन्होंने विदेश जाने का विचार छोड़ दिया। उन्होंने पंजाब सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि सरकार ने उन्हें अपने सपनों को पूरा करने का अवसर दिया है और अब वह पूरी लगन और समर्पण के साथ लोगों की सेवा करेंगी।
गुरलीन कौर की माता राजिंदर कौर ने बताया कि आज उनके लिए बेहद खुशी का दिन है। उनकी बेटी गुरलीन कौर ने भी स्टाफ नर्स के पद पर जॉइन कर लिया है और अब वह उनके साथ मिलकर मरीजों की सेवा करेगी। उन्होंने कहा कि बचपन से उनका सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन वह सपना पूरा नहीं हो सका। इसके बावजूद उन्हें इस बात की खुशी है कि वह स्टाफ नर्स बनकर लोगों की सेवा कर रही हैं और अब उनकी बेटी भी इसी सेवा के क्षेत्र में कदम रख चुकी है। राजिंदर कौर ने बताया कि आज उनका परिवार गर्व महसूस कर रहा है क्योंकि उनकी बेटी के इस पेशे में आने के साथ ही परिवार की तीसरी पीढ़ी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ गई है। उन्होंने कहा कि मरीजों की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं होता और उनकी बेटी भी पूरी निष्ठा के साथ इस जिम्मेदारी को निभाएगी।

