गत दिवस लोकसभा में महिलाओं के लिए संसद में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने वाले संविधान (131 वां संशोधन) विधेयक को लोकसभा में पेश किया गया तथा इस बिल पर सभी विरोधी राजनीतिक नेताओं ने अपने-अपने तर्क पेश किए तथा भाजपा के नेताओं ने विरोधी नेताओं के विरोध का विस्तार से जवाब दिया। पर भाजपा को इस विधेयक के पक्ष में 298 वोट हासिल हुए, जबकि विरोध में 230 सांसदों ने वोट डाला तथा इस बिल को पास करवाने में दो तिहाई बहुमत न होने के कारण यह बिल गिर गया। इस बिल के पास न होने से देश की महिलाओं को जो 33 प्रतिशत रिजर्वेशन मिलना अनिवार्य हो जाना था, अब वह लटक गया है। जिससे देश की महिलाओं को रिजर्वेक्षण का हक जो दिया जाना था देश की महिलाएं उससे वंचित अभी रह गई हैं। जिसके गंभीर नतीजे कांग्रेस पार्टी तथा उनके सहयोगी दलों को इस बिल का विरोध करने के लिए भुगतने पड़ेंगे। उक्त विचार भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डा.सीमांत गर्ग तथा जिला उपाध्यक्ष राहुल गर्ग ने इस बिल के पास न होने पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रकट किए। उक्त नेताओं ने कहा कि यह देश की महिलाओं को रिजर्वेक्षण का मान सम्मान देने के लिए महत्वपूर्ण विधेयक था, जिसको विपक्ष ने अपने हठी रवैये कारण स्वर्ण अवसर खो दिया है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण आरक्षण बिल के पास न होने के कारण विपक्षी राजनीतिक पार्टियों को पूरे देश में महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा तथा महिलाओं को जबाव देना होगा कि उन्होंने महिलाओं को उनके हक मिलने में रुकावट डाली है। उन्होंने कहा कि बिल के पास न होने से सरकार की विफलता नहीं, बल्कि कांग्रेस व उसकी सहयोगी पार्टियों द्वारा देश की महिलाओं पर हमला है तथा यह विधेयक के पास न होने से विपक्षी पार्टियों पर काला धब्बा लगा है। उन्होंने कहा कि इस बिल के पास न होने के कारण कांग्रेस तथा उसके सहयोगी दलों के विरुद्ध पूरे देश में भाजपा द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे तथा देश की महिलाओं को विपक्षी पार्टियों द्वारा महिलाओं के आरक्षण के विरोध में जो रणनीति बनाई गई थीं उसकी सख्त शब्दों में निंदा करके विपक्षी पार्टियों के पुुतले फूंके जाएंगे। उन्होंने कहा कि 1947 के बाद देश में पहली बार मोदी सरकार द्वारा देश की महिलाओं को मान सम्मान दिया जाना था, ताकि देश की महिलाएं भी आगे बढ़कर देश की तरक्की व विकास में अपना सहयोग डाल सके। पर विपक्षी नेताओं की विरोधता के कारण देश की महिलाएं अब इस 33 प्रतिशत आरक्षण विधेयक के 131 वें संशोधन का लाभ नहीं उठा सकेंगी। उन्होंने विपक्षी नेताओं के रवैये की सख्त शब्दों में निंदा की।

